________________ धाम्म // अहानि कतिचित्तत्र / तस्थौ सौधे तदर्पिते // 55 // एकदा तस्य मध्याह्ने / भुक्त्वा धाम्नि निसार्थ षेपः // आगाजागादिविदेषि-विश्लेषिश्रमणयं // 53 // यन्मलक्लेदमप्यंगे / गंधधूलिधिया द | धौ // विवेद खेदबिंदूंश्चा-मुक्तमौक्तिकममनं // 24 // दिव्यांशुकाधिकामास्थां / ययौ जीर्णेऽपि 445] वाससि // यत्पामरमुखाक्रोशा-नपि मेने स्तवानिव // 55 // समस्तवस्तुसौंदर्य-ध्वंसने पिशु. नोचिते // वैरिणीव शरीरेऽपि / नानुबंध बबंध यत् // 56 / / तन्मुक्तमानमानम्य / सम्यग्भावनया दमन राजाने पोताना राजानुं कार्य निवेदन करीने ते तेणे थापेला महेलमां त्यां केटलाक दिवसोसुधी रह्यो. // 5 // हवे एक दिवसे मध्याह्नसमये नोजनबाद जेवामां ते घरमां बेठो ने, तेवामां रागयादिक शत्रुनने दूर करनारा बे मुनिजे त्यां श्राव्या. // 53 // तेना शरीरपर र. हेला मलना खरेटा पण कस्तूरीसरखा सुगंधी लागता हता, तथा पसीनाना बिंदुन मोतीना था. शुषणसरखा देखाता हता, // 14 // वळी जेन जीर्ण वस्त्रमा पण दिव्य वस्त्रथी अधिक यानंद मानता हता, तथा नीच लोकोना मुखना अश्लील शब्दोने पण ते स्तुतितरीके मानता हता / // 55 // सघळी वस्तुनी सुंदरतानो नाश करनारा पिशुनसरखा शरीरमां पण वैरीनीपेते ते Jun Gun Aaradhak Trust PP.AC.Gunratnasuri M.S.