________________ धम्मि। // श्राश्रयस्तेजसामेकः / स्वपदावलगर्वितैः // अवेष्ट्यत दणादेष / तैर्दीपः शलनैखि // 67 // तेज्योतिबिन्यती श्यामा / परिरेने दृढं प्रियं // अनन्यशरणामुष्य // विवकुखि वर्मणि // 6 // चेटानिव यमस्यामू-नहं श्यामे यमालयं // दणान्नेष्यामि तन्मा भै-रभ्यधत्तेति तां रथी // ६ए / 427 सोऽथ सन्नाहमाधाय / प्रियां पृष्टे विधाय च // चिल्लानामन्यमित्रोऽनु-दमिः स विषनियां // // 50 // कुंडलीकृतकोदंडः / कांमश्रेणीरथामुचत् // प्रावृषः परिवेषीव / वारिधारा दिवाकरः / / 1 / / युक्त थयेला ते निल्लोए कणवारमां घेरी लीधो. // 67 // ते निलोथी अत्यंत मरती एवी ते श्याः मदत्ता बीजो आधार न मलवाथी जाणे तेना शरीरमां पेशी जवानी बावाली होय नहि तेम पोताना नर्तारने मजबूत आलिंगन करीने रही. // 67 // त्यारे अगलदत्ते तेणीने कडं के य. मना दाससरखा था निलोने दणवारमा यमने घेर पहोंचाडी देश्श, माटे तुं डर नहि. // 65 // पनी बखतर पहेरीने तथा पोतानी स्त्रीने पाउल राखीने शत्रुना नयने नदि गणकारतो एवो ते अगलदत्त ते निल्लोसाथे लमवा लाग्यो. // 70 // धनुष खेंचीने वर्षाथी घेरायेलो सूर्य जेम ज. लधाराने तेम ते बाणोनी श्रेणि मुकवा लाग्यो. // 71 // तेना शरपातथी डरेला ते निल्लो त्यां. PP.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust