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________________ धम्मिः। श्रोतः पूरबिनीषणां // क्षुद्रोपद्रव ऋयिष्टां / सर्वतोद्भिन्नकंदलां // 50 // यत्नात् स तां वनी क्रामन् / / | नवस्थ श्व संसृतिं // ददर्श पतितं दंड-कुंमिकोपानहादिकं // 51 // श्यामां सोऽभिदधे चिढ़साथ | रेनिर्जानामि नामिनि // पलायतेस्म कोऽप्यत्र / सार्थो व्यालजिया पुरा // 5 // अनी वार्त | या कंप–मानां मृचलतामिव / / मा भैरिति रथी स्थाम-धामधीस्तामधीरयत // 53 // साशंकं पाउल पमीने तेनने पोताना स्वामी यमपासे ले जाय बे, अर्थात् मारी नाखे बे. // 45 // शियाळोना समुहथी नरेली, फरणाना समुहथी जयंकर थयेटी, घणा क्षुष नपज्वोवाळी तथा सर्व जगोपर फुटेला अंकुरानवाळी // 50 // एवी ते अटवीने संसारी माणस जेम संसारने तेम नळंगतांथकां ते अगलदत्ते त्यां पडेलां दंड, कुंमी तथा पगरखां श्रादिक जोयां. // 11 // त्यारे ते श्यामदत्ताने कहेवा लाग्यो के हे स्त्री! या चिन्होथी हुं जाणुं बु के हाथीना मरथी अगाडी कोक सार्थ जागी बुट्यो . // 52 // एवी रीते जयनी वातथी कोमळ वेलडीनीपेठे कंपती ए. की ते श्यामदत्ताने निर्णय तथा बल अने तेजस्वी बुझिवाळा अगलदत्ते धीरज थापी के, हे प्रि. | ये! तुं जरा पण डर नहि. // 53 // एवामां शंकासहित चालता एवा ते अगलदत्तनी सामे. Jun Gun Aaradhak Trust P.P.AC.Gunratnasuri M.S.
SR No.036432
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages205
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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