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________________ धम्मि- लावतः // 11 // इत्युपेदयैव तां तस्य / प्रातः श्रमविधायिनः // याविरासीधृदिन्यासी-कृतना म वा कदापि सा // 72 // रक्ताशोकतरोः शाखां / समालंब्य पुरः स्थितां / / वद कासि किमेतासि / त्वं तन्वीति स तां जगौं // 73 // अवदातोदयदंत-द्युतिदमस्य दंगतः // वरख दिपंतीव / 365 स्नेहयोग्यं जगाद सा // 14 // प्रहमेतद्गृहाध्यदा-यददत्तस्य नंदिनी // नामतः श्यामदत्तेति / त्वामपश्यं गादगा // 35 // त्वां बाणवर्षिणं वोदय / स्पर्डिष्णुरिख मन्मयः // मंयरांगी स्ववाणा स्थानी रात्रिसरखी अंधकारमय स्त्री रहेली ने त्यां कलावाननी ( चंदनी) कला जे दाणवारमानष्ट थाय ने ते युक्तज . // 1 // एम विचारी तेणीनी नपेदा करीने अभ्यास करता एवा ते अ. गलदत्तनी पासे एक दिवस प्रन्नातमा हृदयमां प्रेम धरनारी ते युवती प्रगट थर. // 7 // लाल अशोकवृदनी माळी पकमीने सामे उनेली ते स्त्रीने अगलदत्ते कहीं के हे तन्वि! तं कोण ? तथा केम प्रावी ? // 13 // दांतोनी प्रकट थती श्वेत कांतिनी हारना मिषयी जाणे तेने वरमाळा पहेरावती होय नहि तेम ते स्नेहाळ वचन बोली के, // 14 // हुँ या घरना मालीक य. ददत्तनी श्यामदत्ता नामनी पुत्री डं, तथा फरुखामां बेशीने में तने जोयो बे. // 55 // बाणो. P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036432
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages205
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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