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________________ धम्मि- जोजनावसरेंजोज-नयना पथि गबती // श्रमं निराकर्तुकामा / स्थापयामास सा रथं // 13 // प्रवेष्टुमदमे मध्ये / ग्राम योषित्वन्नावतः // अन्यागत्येंगितझान-प्रवीणो धम्मिलो जगौ // साथ // 4 // विलाये मास्म जायेथां / युवामत्रैव तिष्टतां // गत्वा भोजनसामग्री-मानयामि तं त्व. 513 | हं // 35 // यथावस्थाप्य ते तत्र | ग्राममध्यमसौ गतः // युक्तमस्तोकलोकेन / ग्रामस्वामिनमैद | त // 76 // तुरंगं लोकमध्यस्थं / / दर्श दर्श विषादिनं // प्रणिपत्य तमप्रादीत् / स विषादस्य का रणं // 7 // ग्रामाधीशोऽवदङ्ग / किशोरो मे सलदणः // हेतोः कुतोऽप्यनुदिनं / दीयते क तारवामाटे रथ ननो राख्यो. // 73 // हवे इंगितझानमा हुशियार एवा ते धम्मिले तेनने स्त्री. खनावथी गाममां जवाने असमर्थ जाणीने सामे आवीने कडं के, // 14 // तमो मुंफा मां, अने अहींज रहो, अने हुँ गाममां जश्ने जलदी नोजननी सामग्री लावू बु. // 35 // पनी तेनने त्यां राखीने धम्मिल गामनी अंदर गयो, त्यां तेणे घणा माणसोथी युक्त थयेला ते गाम|ना ठाकोरने जोयो. // 16 // त्या माणसोनी वच्चे रहेला एक घोमाने जो जोस्ने खेद पामता | एवा ते कोरने नमीने तेणे खेदनुं कारण पूज्युं. // 7 // त्यारे कोरे कडं के हे नद्र! मा P.P. Ac Gunratnasur M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036432
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages205
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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