SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 161
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ धम्मि- हयत् // 4 // असावैबन्निशो वृधि / जानन्निव वपुःस्थितिं / दिदृक्षुस्तस्य रूपं सा / ग्रंशं चुप कनी पुनः // 20 // यात्तं यस्यानया नाम / सोऽन्यः कश्चन धम्मिलः // न हिं कस्यापि नाम्नः स्या-देक एव वितु वि // 21 // अहं स्वनामश्रवणात् / साथै तमोऽनयोवृथा // मपं नन्विमे | प्रात-दिय द्वेषं गमिष्यतः // 12 // एवं चिंतयतस्तस्य / पथि पर्यगलन्निशा // तदा च ध्वस्ततिमिरः / सहस्रकर नद्ययौ // 53 // जपायनीकृतानेक-प्रफुल्लांगोजसौरजां // असौ निरैदत न. बुच्चो धम्मिल सारथी थश्ने चंपा नगरीने मार्गे रथना घोमानने हंकारखा लाग्यो. // 45 // ह. वे ते धम्मिल पोताना शरीरनी स्थिति जोश्ने रात्रीनी वृद्धि बवा लाग्यो, तथा ते राजकन्या तेनुं रूप जोवामाटे रात्रिना नाशने श्बवा लागी. // 20 // था तापसी ( ते वखते ) जेनं नाम बोली ने ते. को बीजोज धम्मिल होवो जोश्ये, केमके कोर पण नामनो या जगतमां को. 3 एकज माणस कई मालिक होतो नथी. // 51 // वळी हुं मारं पोतानुं नाम सांजलीने फोकट या बन्नेनी साथे चाल्यो लु, खरेखर था बन्ने प्रचाते मारू रूप जोश्ने गुस्से थशे. // 55 // एम . | ज्यारे ते चिंतवतो. तो त्यारे मार्गमांज रात्री संपूर्ण थक्ष, अने ते वखते अंधकारने नाश कर P.P.AC.Gunratnasurn M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036432
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages205
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy