________________ साथै धम्मि- याता धनांगजा // इंदुलेखेव तच्चेतो-वार्षिमुनूंखलं व्यधात् // .73 // प्रत्यदवनदेवीव / सा प / व्यंके निषेदुषी // मद्यं मृदृक्तिरत्यर्थ्य / पाययामास सा पुतं // 4 // प्रथम मदनेनासौ / पश्चा न्मदनयानया // गतजीव वारद–श्चैतन्यबंशमाप सः // 5 // अथ तस्यैव खगेन / शिरस्त. ए| स्य बुलाव सा // साहसिक्यो ध्रुवं प्राण-दानग्रहणयोः स्त्रियः // 6 // स्व एवासिर्विनाशाय / तस्याजायत सांप्रतं // घाटी स्वघोटकैरेव / यतः पतति दुधियं // 7 // सा तमेव तलारद-कं. घेर तेम अशोकवाटिकामां गयो. // 7 // ते वखते मनोहर श्रृंगारवाली धनश्री पण त्यां श्रावी, तथा चंनी कळानीपेठे तेणीए तेना चित्तरूपी समुद्रने नरळेलो कर्यो. // 3 // पछी प्रत्यद वनदेवीनीपेठे तेणीए पलंगपर बेशीने मिष्ट वचनोथी प्रार्थनापूर्वक जलदी तेने मदिरापान का राव्यु. // 4 // हवे प्रथम कामदेवथी तथा पजी या मदिराथी जाणे निर्जीव थयो होय नहि तेम ते कोटवाल चैतन्यरहित थयो. // 5 // पनी तेणीए तेनीज तलवारयी तेनुं मस्तक बेदी नाख्यु, केमके स्त्रीने खरेखर प्राणो देवामां तथा लेवामां साहसीक होय . // 6 // एवी रीते | ते समये तेनी पोतानीज तलवार तेनो नाश करनारी थर, केमके दुर्बुघिमाणसपर तेना पोता- | - P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust