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________________ एए धाम्म झरौषधरसै / रसेंडः स्थैर्यमाप्यते // निश्चलः क्रियते शाखा-मृगो रज्जुनियंत्रणैः // 15 // कंपः मा प्रकंपनस्यापि / धृत्या वृत्त्यापनीयते // न तु केनापि चापल्यं / त्याज्यते कामिनीमनः // 20 // ध्यात्वेति तस्या थाहत्या–पहस्तेन स सत्कृपः / वातेन कदलीकांम-मिव बाहुमधूनयत् // 1 // | तस्या विश्वस्तघातिन्या। अन्यायोद्यतचेतसः // अनिबन्निव संस्पर्श / कृपाणः पाणितोऽपतत् // // // श्राः स्खं पतिमहं हंतुं / कुस्त्रीसंगात् प्रचक्रमे // इत्यात्मकृत्यशःखार्त / श्व खमोबुद | नीच बुद्धिवाळी या स्त्री घुवमी जेम अंधकारनी श्वाथी सूर्यनो तेम विषयनी श्वाथी पावा पु. रुपनो पण देष करे . // 17 // धातुवादीन औषधना रसथी पाराने स्थिर करी शके ने, तथा दोरीथी बांधवाथी वांदराने पण निश्चल करी शकाय ने, // 15 // वायुनो वेग पण धीरजथी वा. डवडे दर करी शकायचे, परंतु स्त्रीना मननी चपलता कोश्थी पण गेडावी शकाती नथी. // 20 // एम विचारीने मारा था दयाबु भाइए वायुथी जेम केळना थंनने तेम पोताना मात्रा हाथथी ते. णीनो हाथ खूब कंपान्यो. // 11 // ते वखते विश्वासघात करनारी तथा अन्यायमां नद्यमवंत म. नवाळी एवी ते स्त्रीना स्पर्शने जाणे न श्बती होय नहि तेम तेणीना हायमांथी तलवार पसी P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036432
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages205
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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