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________________ धम्मि- / तदा तनयमानय / अन्यथा मे प्रियप्राणा / न तिष्टंति धृती अपि / / 77 // जाननपि. धियां धाम / सुरेजस्तदनागमं // प्रैषीदुपसुतं भृत्यान् / सद्यः पन्याः समाधये / / 70 // गतास्ते वेश्म वे. श्याया / एवं धम्मिलमूचिरे // वत्स वत्सलमाता ते / सकृदर्शन मिति // 70 // जातोऽप्यजात. वन्मातु-स्त्वं जातोऽसि गुणाकर // यत्तुल्यं त्वदनालोक-दुःखमद्यापि पूर्ववत् // 70 // गतांगवर्ष एक युग जेवहुं थर पडेबुं . // 6 // हवे हे स्वामी ! जो आप मने जीवती जोवाने इ. बता हो तो पुत्रने लावो? नहिंतर मारा था वहाला प्राण जाली राख्यायी पण रहेवाना नथी. // 7 // त्यारे ते बुझिवान सुरेंद्रदत्ते विनायु के ढवे ते धम्मिल पागे तो आववानो नथी, तो पण तेणे पोतानी स्त्रीना मनना समाधानमाटे तुरत नोकरोने पोताना पुत्रपासे मोकल्या. || तेनए वेश्याने घेर जश् धम्मिलने कडं के हे वत्स! तारी प्रेमाळ माता तने एकवार जोवाने इ. बेबे // // वळी हे गुणवान! तुं जन्म्या बतां पण तारी माताने तो अजन्म्या जेवो ई, के. मके तने नहि जोवानुं तेणीनुं दुःख तो हजु पण पूर्वनीपेने सरखंज रहां जे. // 70 // आज | गतमा उ ऋतु गमनागमन करे , परंतु तारी माताना शरीरमां तो जनाळो अने अांखोमांव ) Jun Gun Aaradhak Trust PP.AC. Gunratnasuri M.S.
SR No.036430
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages173
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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