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________________ " अर्थः-पछी वसुदेव राजाए घणां रत्नो तथा क्रोडोगमे सोनाम्होरोथी बारिकापुरीमा ते पुत्रनो महान् of देवकीपुत्र जन्मोत्सव को. // 76 // सूतक शुद्धिं कृत्वे-कादशदिवसे समप्रबंधुजनं // संतोष्य द्वादशमे / पितरौ तस्यांगजस्य पुनः // 7 // 20 // गजसुकुमालेत्यभिधा-मतिष्टिपन केशवादयो दृष्टाः // गजतालकवत्कोमल-तया यथार्थ महैविविधैः 78 lab अर्थः-पछी अग्यारमे दिवसे सूतकशुद्धि करीने, तथा सर्व स्वजनवर्गने संतोषीने बारमे दिवसे ते पुत्रना मातापिता, / / 77 // तथा कृष्णआदिकोए आनंदित थइने, हस्तीना तालु सरखां कोमलपणाथी विविधप्रकारना महोत्सवपूर्वक तेनुं “गजसुकुमाल" एषु यथार्थ नाम पाडथु. // 78 // युग्मं // , . बाल्ये स लाल्यमानों / धात्रीभिः पंचभिः परां वृद्धिं // प्राप्तः पित्रोंः परमां / प्रीतिं चक्रे कुमारेंद्रः // 79 // ___ अर्थ-पछी बास्यपणामां पांच धावमाताओवडे लाडलडावतो ते गजसुकुमालकुमार अधिक वृद्धिने पामतो l काथको मातापिताने परम प्रीति उपजाववा लाग्यो. // 79 // . .. कलयांचक्रे काले / कलाविदः सद्गुरोः कलाः सकलाः॥मधुकर इव स कुमारः। सुकुमारो रसमिवांबुजतः / अर्थ:-पछी भ्रमर कमलमांथी जेम रसने ग्रहण करे, तेम ते सुकुमाल गज़सुकुमालकुमारे कलाभोने जाण Justa 208999888 Beeeeeeees HD
SR No.036429
Book TitleDevki Putra Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShubhvardhan Gani
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1934
Total Pages41
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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