________________ 14/ श्रीगौतम-स्वामी-चरित्रनो गुजराती अर्थ जिनेश्वर महावीरे. त्रिपदीने स्थाने (द्वादश) अंगोथी सम्पन्न 'द्वादशांगी'नी रचना करी पोतानु वेद-विद्यानु ज्ञान बतावी आप्यु॥२७॥ पोते वेदज्ञानविद् होवा छतां अन्य अज्ञानी जीवोना हित माटे गौतमस्वामीए जिनप्रभुने स्थिरचित्ते अनेक प्रश्नो कर्या // 28 // जिनेश्वरोए देवदेवी क्रियाने करवामां प्रमादने मूकीने जे करवामां हमेंश तत्पर छे अने बळी जेओ छठू तपने करे छे तेवा श्रीगौतमस्वामीने मंगल्यवड़े नमस्कार कर // 29 // ___ महावीर स्वामीना उपदेशथी पूर्णप्रभे महासंयमनी दीक्षा लई यमनियमनु पालन करीने अनेक लोकोए कैवल्यपदनी प्राप्ति करी हती // 30 // , पोतानी पासे जे न हतु छता जेना बड़े बीजाओने श्रेष्ठ पंचम केवलज्ञान बीजाने अपाव्यं हतुं अने जेणे आ विश्वने विशे अद्भुत लख्यु छे तेवा श्रीगौतमस्वामीने नमस्कार करवा / / 31 / / स्वशक्तिथी पवित्र एवा अष्टापद पर्वत उपर जइने जेओ जिनेश्वशेने वंदन करे छे तेओ ते ज भवमां मोक्षमां जाय छे एजेणे वीरभगवान पासेथी सांभळय छे तेवा गौतमस्वामीने नमस्कार करवा // 32 // P.P.AC. GunratnasuriM.S. Jun Gun Aaradhak Trust