________________ गुजराती अर्थ /13 जिनेश्वर प्रभुनी पासे पहोंचता तेमने अनेक अननुकूलताओ सांपडी प्रथम तो तेमने जोतांज गौतमस्वामोने परम आश्चर्य थयु....॥१७॥ हुं मारी कीर्ति बचाव ना हवे शुकरु ? जो हुं अहीं आव्यो ज न होत तो ? एका विचारे जेमनु मन डोलायमान थतु हतु....तेवा मंगलकारी गौतमस्वामीने नमस्कार / / 18 / / - मारा सद्भाग्ये अहीं पण जो मने विजय मळे तो समग्र विश्वमां हुं अद्वितीय-त्रेजोड़ बनीश, एवा विचारे ते ओ आगळ धप्या // 19 // त्यारे सुवर्ण सोपानो पर ऊभेला धीर, वीर, महावीर प्रभुए गौतम स्वामीने तमना नाम एवं गोत्रयी प्रेमपूर्वक संबोध्या-बोलाव्या // 20 // मारा विश्वविख्यात एवा नामने आ जाणे छ तेमां कांई नवाई आश्चर्य नथी, परन्तु मारा मनमां जे अत्यना गुप्त विचार छ तेनं तेओ जाणी जाय (अने कहे) तो हुं तेमने खरा 'अर्हन' कहुं....आवा अनेक तर्क वितर्को गौतमस्वामीने करता हता / / 21 / / __ त्यारे जिनेश्वर प्रभुए पूछ यु'हे इन्द्रभूति' जीवना अस्तित्व विषे तने शंका शा माटे छे ? आ (प्रश्न) ओळखवानी साथे अभिमानो गौतम स्वामी नम्र बनो गया // 22 // वेदोना गहन सूक्तोना घोषथी जिनेशे तेमनी ए शंकाने दूर करी त्यारे तेओ प्रमु जिनेशना शिष्य बनी गया तेषा मंगळकारी गौतमस्वामीने नमस्कार // 23 // पचास वर्ष ती ऊमरे जेनां वड़े श्रीमहावीर स्वामी तीर्थकरनी पासे विशुद्ध एवं दीर्घ महाचारित्रने ग्रहण कराव्यु छ तेवा श्रीगौतमस्वामीने मंगल्य वडे नमस्कार करवु // 24 // पछीतो गौतमस्वीमीना अनुयायी एवा विद्वानो पण वेदवाक्योमां ज्यां ज्यां शंका थती हती ने शंका रज करवा आव्या, जिनेश्वरे तेमनी सौनी शंकानुनिवारण कयं अने तेमने दोक्षा आपी // 25 // तेमांथी 110 महावीरस्वामीनां तीर्थमां आवीने गणाधीश्वर बन्या अने गौतमस्वामी ते बधामा प्रधान गणाधीश्वर थया // 26 / / P.P.AC. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust