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________________ 12/ श्रीगौतम-स्वामी-चरित्रनो जीवात्माना अस्तित्व बाबत वेदमां कहेल वातोथी जेनु मन शंकाशील थयु हतु छतां पोते निःशंक थईने फरता तेवा मंगलकारी गौतम स्वामोने नमस्कार // 8 // 'अपापा' नामनी नगरीमा जेमनां आदेशथी देश-विदेशमाथी विद्वानो एवां जनसमाज आवेल तेवा मगलकारी गौतम स्वामीने नमस्कार / / 9 / / . प्रसन्न चित्तथी वेदमंत्रोथी ज्यारे तेओ यज्ञनो विधि करावता हता स्वारे तेमना वेद-घोषथी बधा लोको प्रसन्न थयेळा...तेवा मंगलकारी गौतम स्वामीने नमस्कार / / 10 // "बीजी तरफ जिनेश्वर श्रीमहावीर जगतमां विचरता" सद्भाग्ये ते 'अंपाया' नगरोमां आवी पहोंच्या... तेवा मंगलकारी गौतम स्वामीने नमस्कार // 11 // सत्पुरुषों पासेथी सकलगुण सम्पन्न जिनेश्वरनां आगमननी खबर मळी परन्तु विद्याभिमानथी मत्त एवा गौतम स्वामीए तेनी दरकार करी नहीं / / 12 // जिनेश्वर प्रभुनी सेवा माटे उत्साहपूर्वक देवगण भेळो थयेलो, त्यारे गौतम स्वामीने एम लाग्युके ते देवगण मारी (पोतानी) पासे आवे छे // 13 // / परन्तु देवसमूह तेमनी पासे न गयो त्यारे तेमनु मन भांगी पऽयं, अने तेओ जिनेश्वर धूर्त छे एम विचारवा लाग्या // 14 // . __ हं महान वादी (वाद-विवाद करनार) जीवतो हं त्यारे आ पोताने सर्वज्ञ माननार कहेव-डनार बीजो वादी छे कोण ? एवो तेमने गर्व थयो / // 15 // . . . . . . . हुं एकवार पण आ (जिनेश्वर) ना गर्वने सही लेवानो नथी-एवु विचारी गौतम स्वामी पोताना बधा शिष्यो साथे (जिन प्रभुंनी सामे) वाद-विवाद करवा उपहया त्यारे तेमना स्नही हितेच्छु बंधुजनोएं रोक्या तो पण ते उतावल करीने ऊपड्या // 16 // P.P.AC. GunratnasuriM.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036425
Book TitleChar Granth Sangraha - Panch Parmeshthi Gunmala - Chaturvinshati Jinstutaya - Varnakram Sukti Panchashika - Gautam Swami Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijaydharmdhurandharsuri
PublisherSyadvadamrut Prakashan Mandir
Publication Year1994
Total Pages145
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size98 MB
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