________________ सकल लब्धि-सम्पन्न गौतम स्वामी ने नमस्कार श्रीगौतमस्वामी चरित्र (छन्द भुजंग प्रयात) (गुजराती अर्थ ) जेमनुं चरित्र परम पवित्र छे, आनन्द आश्चर्यजनक छे, महान विघ्नोनी जालने कापी नाखरनार छे अने प्रशंसापात्र अनेक प्रभावोथी सभर छे तेवा मंगलकारी गौतमस्वामीने अमारा नमस्कार हो // 1 // जेमनो जन्म धनवान ब्राहाण परिवारमा थयेलो, जेमनां माता पृथ्वी समान अनन्य उदार चरिता हता, जेमर्नु 'इन्द्रभूति' एवं प्रसन्न कारी नाम हतु तेवा गौतमस्वामीने नमस्कार / / 2 / / तेमणे वेद-वेदांगादि शास्त्रोनो अभ्यास करेलो, विशाल एवा क्रियाकांड कलापनो पण अभ्यास करेलो अने 'महाकर्मकांडी' तरीकेनी जेमनी कीति हती तेवा गौतम स्वामीने नमस्कार / / 3 / / 'मारा सिवाय कोई सर्वज्ञ नथी. वादी, वक्ता के नेता (पण) नथी, एवं तेमने मिथ्या अने दृढ अभिमान हतु' एवा गौतम स्वामीने नमस्कार / / 4 / / त्रैलोक्यमां कोई पण शास्त्रनां समस्त अर्थने जाणनार, प्रचंड वादविवाद करी शकनार हूंज छं, मारो कोई जोटो नथी एव जेमने (मिथ्या) अभिमान हतु तेवा गौतमस्वामीने नमस्कार // 5 // मोटा-मोटा आचार्यों पण जेमनी पासे विशिष्ट शब्द एवं अर्थरचना समजवा आवता, तेमनां शिष्य बनता, तेवा मंगलकारी गौतमस्वामीने नमस्कार // 6 // समग्र विश्वमां मारा यशनां गान गवाय छे, तेथी मारा जेवो यशस्वी अने वाक्पट बीजो कोई नथी, एवा विचारे जे मत्त हता तेवा मंगलकारी गौतम स्वामीने नमस्कार // 7 // P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust