________________ 10/ श्रीगौतमस्वामी चरित्रनो भरते भराव्या देह वर्ण प्रमाण बिंबथी. राजता, आव्या गिरि अष्टापदे रची स्तोत्र जगचिंतामणि / जे रत्नमय चउवीश जिनने स्वर्ण चैत्ये संस्तवे, ते मंगलार्थे श्रीगुरु गौतमतणां पदकज नमु // 34 // 'श्रीविजय धर्म धुरन्धराचार्ये' रचेला स्तोत्रने, जोतां ज दिल हरखी उठ्य ने तरत ते मनमां वस्युं / गौतमतणां गुणगान करता सतत उत्सुक हृदय ने, एथी थयो अतिहर्ष, जे पद्यानुवाद करी शक्यो / / 35 // श्रीनेमिसूरि राजपाटे सूरि अमृत बुधवरा, . गुरु देवसूरि शिष्य सूरि हेमचन्द्र आ मुदा। . निधि वेद अंबर नेत्र (2049) वर्षे भावनगरे भक्ति, पद्यानुवाद रच्यों मनोहर वीर विभु सांनिध्यथी // 36 // (विक्रम संवत् 2049 आश्विनी पूर्णिमा, भावनगर) आचार्य-प्रवर श्रीमद् देवसूरि-महाराजनां शिष्य श्रीहेमचन्द्र सूरि कृत गुजराती पद्यानुवाद पूर्णहुआ / P.P.AC. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust