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________________ गुजराती पद्यानुवाद !9 परिवार चम्मालीश शत सह मख्य बुध अग्यार जे, दीक्षित थया स्थाप्या प्रभूए तेहने गणधर पदे / कल्याणकर शासन ती थई स्थापना इम जेहथी, ते मंगलार्थे श्रीगुरु गौतम तणां पदकज नमु // 27 // AAINA प्रभुवदनथी त्रिपदी लइने बीज बुद्धिना धणी, अन्तर मुहूर्त काळमां जे द्वादशांगी रचे गणी / श्रुतरूप गंगोत्पत्ति काजे शोभता हिमगिरि समा, ते मंगलार्थे श्रीगुरु गौतमतणां पदज. नमुं // 27 // विनयथी अतिनम्र तेओ भविकजन हितकारणे, बधुं भणतां होवा छतां प्रश्नो प्रभुने पूछतां / 'गोयम' कही प्रभु वीर तेना जेने उत्तर आपतां, ते मंगलार्थे श्रीगुरु गौतमतणां पदकज नमुं // 29 // प्रभुए प्रबोधली क्रियाओ अप्रमत्त थई कहे, वळी आ जीवन छठ्ठ पारणे ठछ करी को निर्जरे / 'गौतम करो न प्रमाद' इम जेन प्रभुए उपदिश्यु, ते मंगलार्थे श्रीगुरु गौतमतणां पदकज नमुं // 30 / / उपदेश मधुरो सांभळी जस बोध-पामी जन वणा, संसार छोड़ी लेइ संयम ज्ञान केवळने वर्या / जस पाणि-पद्म साचे केवळ दाननी लब्धि सी, ते मंगलार्थे श्रीगुरु गौतमतणां पदकज नमुं॥३१॥ दाता जगतमां कोई निजपास वस्तुने दिये, ना होय जे निजपास तेनुदान किमहिंज संभवे? जेने न केवळ' पास पण दइ दान महा अचरज वयु, ते मंगलार्थे श्रीगुरु गौतमतणां पदकज नमुं॥३२॥ चउवीश जिन जे शैल अष्टापद चडी निज शक्ति, वन्दन करे ते तेना भवमा नक्की मोक्षे संचरे / प्रभुए कहेलां वचन आ सुरपासथी जेणे सुण्यां, ते मंगलार्थे श्रीगुरु गौतमतणां पदकज नमुं॥३३॥ P.P.AC. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036425
Book TitleChar Granth Sangraha - Panch Parmeshthi Gunmala - Chaturvinshati Jinstutaya - Varnakram Sukti Panchashika - Gautam Swami Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijaydharmdhurandharsuri
PublisherSyadvadamrut Prakashan Mandir
Publication Year1994
Total Pages145
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size98 MB
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