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________________ 16 समकित-प्रवेश, भाग-1 प्रवेश : और सामान्य केवली ? समकित : सामान्य केवली को तीर्थकर प्रकृति का उदय नहीं होने से समवसरण आदि बाहरी वैभव नहीं होता, लेकिन अंतरंग-वैभव' यानि कि अनंत चतुष्टय तीर्थंकर जैसा ही होता है। सामान्य केवली तो अनेक होते हैं। भगवान भरत व बाहुबली सामान्य केवली ही तो थे। प्रवेश : भाईश्री ! यह भरत व बाहुबली कौन थे ? समकित : यह दोनों पहले तीर्थंकर राजा ऋषभदेव के पुत्र थे, जो आगे चलकर भगवान (सामान्य केवली) बने। प्रवेश : कृपया पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के बारे में बताईये। समकित : ठीक है ! उनकी कहानी तुमको कल सुनाता हूँ। राजा ऋषभदेव राजकुमारी ब्राह्मी व सुंदरी को पढ़ाते हुये 1.internal-magnificence
SR No.035325
Book TitleSamkit Pravesh - Jain Siddhanto ki Sugam Vivechana
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMangalvardhini Punit Jain
PublisherMangalvardhini Foundation
Publication Year2019
Total Pages308
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size117 MB
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