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________________ द्वितीय परिशिष्ट : संकेताक्षर और सहायक ग्रन्थ-सूची संकेताक्षर ग्रन्थ प्रकाशन 138 देव, शास्त्र और गुरु शास्त्रकार-आचार्य शास्त्र समय, परिचयादि असग वर्द्धमान चरित, ई. सन् 10 वीं शताब्दी। व्याकरण तथा काव्य शान्तिनाथ चरित के ज्ञाता थे। हरिचन्द्र धर्मशर्माभ्युदय, ई.सन् 10 वीं शताब्दी। दोनों काव्य उत्तम कोटि जीवन्धरचम्पू वाग्भट्ट प्रथम नेमिनिर्वाणकाव्य ई. 1075-1125 / वाग्भट्ट कई हुए हैं। चामुण्डराय चारित्रसार, ई. सन् 10 वीं शता.। इन्होंने श्रवणवेलगोला चामुण्डरायपुराण में बाहुबलिस्वामी की मूर्ति की प्रतिष्ठा ई. सन् (त्रिषष्ठी-लक्षण 981 में कराई थी। महापुराण) अभिनव वाग्भट्ट काव्यानुशासन, वि. सं 14 वी शता.। इनके अन्य ग्रन्थ भी हैं। छन्दोनुशासन, आदि आशाधर धर्मामृत वि. 13 वीं शता.। इनकी बीस रचनायें हैं। (सागार और अनगार) अर्हद्दास मुनिसुव्रतकाव्य, वि. 14 वीं शता.. अन्य रचना पुरुदेवचम्पू भव्यजनकण्ठाभरण राजमल्ल लाटीसंहिता, वि. १७वीं शता.। पंचाध्यायी का द्वितीय अध्याय जम्बूस्वामीचरित, भी अपूर्ण ही है परन्तु जैनसिद्धान्तों के हृदयअध्यात्मकमल- ङ्गम करने के लिए बहुत उपयोगी है। लाटीसंहिता मार्तण्ड, में श्रावकाचार है। ये काष्ठासंघी विद्वान् थे। कई पंचाध्यायी (अपूर्ण), नए सिद्धान्त प्रस्तुत किए हैं। पिङ्गलशास्त्र अभिनव चारुकीर्ति प्रमेयरलालंकार, ई.१६वीं शता. / प्रमेयरत्नमाला की प्रमेयरत्नालंकार / पण्डिताचार्य गीत-वीतराग टीका है। दौलतराम द्वितीय छहढाला वि. सं. 1855-56 के मध्य। अन, ध, अनगारधर्मामृत पं. शाप, शो--पुरइ.. 1527 अमितगति श्रावकाचार द. जैन परमानय, सूरत, वि.सं. 2484 अष्टसहस्री आ. विद्यानन्द, दि. जैन त्रिलोक शोध संस्थान, हस्तिनापुर, ई. 1972 आ.अनु. आत्मानुशासन गुणभद्र, सनातन जैन ग्रन्थमाला, ई. 1905 आप्त. प. आप्तपरीक्षा आ. विद्यानन्द, वीरसेवामन्दिर, सरसावा, वि.सं. 2006 आ.मी. आप्तमीमांसा (देवागम) समन्तभद्राचार्य, वीरसेवा मन्दिर ट्रस्ट, दिल्ली, ई.१९६७ आस्पेक्ट ऑफ ग्रन्थाङ्क 3, पा.वि. शोध संस्थान, वाराणसी, जैनोलाजी ई. 1991 इष्टोपदेश वीरसेवा मन्दिर, दिल्ली एकीभावस्तोत्र ज्ञानपीठपूजाञ्जलि, वाराणसी, 1957 क.पा. कसायपाहुड गुणधराचार्य, जयधवलाटीका सहित, दि. जैन संघ, मथुरा, वि.सं. 2000 का.आ. कार्तिकेयानुप्रेक्षा राजचन्द्र ग्रन्थमाला, ई. 1960 सामायिक दण्डकी टीकासहित क्रियाकलाप पन्नालाल सोनी, आगरा, वि.सं. 1913 क्रियाकोश पं. दौलतराम क्षपणा क्षपणासार जैन सिद्धान्त प्रकाशिनी संस्था, कलकत्ता गुणभद्र श्रावकाचार श्रावकाचार संग्रह, भाग 1 गो. क. गोम्मटसार कर्मकाण्ड नेमिचन्द्राचार्य सिद्धान्तचक्रवर्ती, जैन सिद्धान्त प्रकाशिनी संस्था, कलकत्ता गो.कर्म. गोम्मटसार कर्मकाण्ड जैन सि.प्र.संस्था, कलकत्ता गो. कर्म/ जीवतत्त्वप्रदीपिका टीका, जैन सि. प्र. संस्था, कलकत्ता जी.प्र. गो.जी. गोम्मटसार जीवकाण्ड जैन सि.प्र. संस्था, कलकत्ता 1. अन्य संकेताक्षर- उ. > उत्तरार्द्ध। गा. > गाथा। टि. > टिप्पण। पृ. > पृष्ठ।
SR No.035321
Book TitleDev Shastra Aur Guru
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSudarshanlal Jain
PublisherAkhil Bharatvarshiya Digambar Jain Vidwat Parishad
Publication Year1994
Total Pages101
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size61 MB
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