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________________ १२ कानुगा एक सुलझे हुए विचारक एवं समझदार युवक हैं। आपकी धार्मिक भावना सराहनीय है । आपका धार्मिक अध्ययन अच्छा है । आपका व्यवसाय अहमदाबाद में है। पूज्य श्री घासीलाल जी महाराज के शास्त्र प्रकाशन मे भी आपने अच्छा सहयोग दिया है । कल्पसूत्र के प्रकाशन में आपने ७०१ रुपये का अर्थ सहयोग दिया है। श्री चन्द जी ललवाणी : सिवाना गढ़ के सांस्कृतिक धार्मिक एवं सामाजिक उत्थान में ललवाणी परिवार का योगदान भी अपूर्व रहा है । श्रीमान् राजमल जी ललवाणी के सुपुत्र श्री डुंगरचन्द जी वाणी एक विवेकनिष्ठ धर्मप्रेमी युवक सज्जन हैं । त्याग व सयम के प्रति इनमें गहरी आस्था है । सन् १६६५ में श्रद्धेय सद्गुरुवर्य श्री पुष्कर मुनि जी महाराज के पास श्री पूनमचन्द जी गुमानमलजी दोशी, वडु (मारवाड) निवासी के सुपुत्र बालब्रह्मचारी रमेश कुमार जी और राजेन्द्र कुमार जी की दीक्षाएं गढ़ सिवाना में बड़े उत्साह के साथ सम्पन्न हुई थीं, उसमें श्री रमेशकुमार जी की दीक्षा आपके घर से हुई थी और उनकी मातेश्वरी धाप वर बहिन की दीक्षा खाण्डप में चन्दनबाला श्रमणी सघ की अध्यक्षा त्यागमूर्ति स्वर्गीय महासती श्री सोहनकुवर जी महासती की सुशिष्या परम विदुषी महासती पुष्पवती जी, प्रतिभामूर्ति प्रभावती जी म० के पास सम्पन्न हुई थी । उनका नाम महासती प्रकाशवती जी हैं । प्रस्तुत कल्पसूत्र के प्रकाशन मे ललवाणी जी ने ५०१ का अर्थ सहयोग प्रदान किया है। सर्व प्रथम स्वाध्यायी संघ, गुलाबपुरा ने एक साथ कल्पसूत्र की १०० प्रतियाँ अग्रिम लेकर हमारे उत्साह को बढाया है । हम उन सभी सज्जनों को हार्दिक धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने अत्यधिक उदारता के साथ अपनी स्वेच्छा से प्रस्तुत प्रकाशन के लिए अर्थ सहयोग प्रदान किया व श्री अमर जैन आगम शोध संस्थान का निर्माण किया । प्रस्तुत संस्थान मरुधर देश में सर्व प्रथम स्थानकवासी जैन धर्म का प्रचार करने वाले आचार्य सम्राट् श्री अमरसिंह जी महाराज के स्मृति में स्थापित किया जा रहा है । प्रस्तुत संस्थान का उद्देश्य स्थानकवासी जैन धर्म का प्रचार करना है । कल्पसूत्र इस संस्थान का प्रथम प्रकाशन है । अन्तगड सूत्र इसी प्रकार नव्य भव्य रूप में द्वितीय पुष्ष के रूप में अर्पित करने का संस्थान का विचार है, अतः हम भविष्य में भी आप सभी के उदार सहयोग की मगल कामना करते है । मन्त्री, श्री अमर जैन आगम शोध संस्थान गढ़ सिवाना ( राजस्थान)
SR No.035318
Book TitleKalpasutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDevendramuni
PublisherAmar Jain Agam Shodh Samsthan
Publication Year1968
Total Pages474
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size18 MB
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