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________________ ( ५३ ) विप्लव वादी योगी महान् प्रतिभाशाली शिव सुख खान । • वाचक स्वर गम्भीर सुधार, ज्ञानकी ज्योति जगाने वाले ॥११॥ गुजरांवाला भूमि प्यारी, गुरुकुल स्थापित हो शुभकारी । -करते कोष लाख इक भारी, सच्चा मार्ग बताने वाले ||१२|| पाठक सोहन विजय सहकारी, पन्यास ललित विजय मनोहारी । वैष्णव विट्ठल बने पुजारी, दानी दान दिलाने वाले ॥१३॥ प्रवर्तिनी देवश्री महाराज, जिनको शिक्षण पर था नाज । उपदेश दे गुरुकुल हितकाज, ज्ञान की महिमा बढ़ाने वाले ||१४|| अखण्ड ब्रह्मचर्य पालन हार, उग्र तपस्वी क्रांतिकार | देवत देशना भवि हितकार, जंगम तीर्थ कहाने वाले ||१५|| आतम वल्लभ शिव सुखकार, सूरि समुद्र गम्भीर उदार । ऋषभ गुरु भक्ति दिलधार, गुरु महिमा के गाने वाले ||१६|| : दोहा : प्रवचनी धर्म कथित हुए, जिन शासन श्रृंगार । वादी तर्क निपुण अति, नैमेत्तिक बलिहार ॥ सद्गुरू करते गोचरी, लेते शुद्ध आहार । सात द्रव्य प्रति दिन लहे, मन सन्तोष आधार ॥ नोव आम्बिल इकासणा, व्रत उपवास अपार । बेले तेले पारणा, तप तपता श्रीकार ॥ ईच्छा रोधन तप करे, बाह्य अभ्यन्तर सार । आत्म शक्ति संचय करे, पर परिणति को निवार ॥ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035306
Book TitleYugpravar Shree Vijayvallabhsuri Jivan Rekha aur Ashtaprakari Puja
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRushabhchand Daga
PublisherRushabhchand Daga
Publication Year1960
Total Pages126
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size16 MB
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