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________________ (३७०) कोई कुमारिका अपने योग्य वर्तावसे माताके चित्तको अतिशय आनंद देगी। कोई २ कुमारी कत्था चूना सुपारी रखकर सुंदरीको पान देगी। कोई उसके गलेमें अतिशय सुगंधित माला पहनायगी। कोई कोई माताके लिये मनोहर शय्याका निर्माण करैगी और कोई रत्नोंके दिया लगायगी । और कोई२ कुमारी भाताके मस्तकपर मुकुट, कानमें कुंडल, हाथमें कंकण,गलेमें हार, नेत्रमें काजल, मुखमें पान, मस्तकपर तिलक, कमरमें करधनी, नाकमें मोती, कंठमें कंठी, पेरोंमें नू पुर, पामकी अंगुलियों में वीछिये पहिनायगी । जब नौमा महिना पास आजायगा तब कुमारियां माताके विनोदार्थ क्रियागुप्त कर्तृगुप्त कर्मगुप्त मौर प्रहेलिका कहकर माताको आनंद वढायगी। कोई पूछेगी, वता माता-शरीरका ढकनेवाला कौन है ? चंद्रमंडलमें क्या है ? और पापकी कृपासे जीव कैसे होते हैं ? माता उत्तर देगी सभा विभा अभाः कुमारियां फिर पूछेगी-वता माता-जीवोंका अंतमें क्या होता है ! कामी लोग क्या करते है ! ध्यानके बलसे योगी कैसा होता है ? माता उत्तर देगी-विनाश १ विलास २ विपास ३ कोई कुमारी क्रियागुप्त श्लोक कहकर मातासे पूछने लगी, बता माता-- शुभेद्य जन्मसंतानसंभवं किल्विषं घनं । प्राणिनां भ्रूणभावेन विज्ञानशत पारगे । १-हे अनेक विज्ञानोंकी आकर ! शुभे ! गर्भके प्रभावसे जीवोंके अनेक जन्मोंसे चले आये वज्रपापोंका नाश करो । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035265
Book TitleShrenik Charitra Bhasha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGajadhar Nyayashastri
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year1914
Total Pages402
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size23 MB
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