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________________ उनकी प्रशंसा निकलने लगी। महाराज श्रेणिकको भी इसवातका परम दुःख हुवा। वे शीघ्र रानीके पास आये और कहने लगे प्रिये ! यह क्या हुवा । मुनिराज अकारण ही क्यों आहार छोड चले गये ? कुछ जान नहीं पड़ता शीघ्र कहो । महाराजके ऐसे वचन सुन रानीने उत्तर दिया____ नाथ ! मैं भी इसवातको न जान सकी मुनिगण क्यों तो राजमंदिरमें आहारार्थ आये और क्यों फिर विना आहारलिये चले गये । स्वामिन् ! चलिये अपन शीघ्र ही वन चलें । और जहांपर वे परम पवित्र यतीश्वर विराजमान हैं। वहां जाकर उन्हीं से यह बात पूंछे । रानी चेलनाकी मनोहर एवं संशय निवारक यह युक्ति महाराजको पसंद आगई। अतिशय तेजस्वी और मुनिदर्शनार्थ उत्कंठित वे दोनों दंपती जहां मुनिराज विराजमान थे वहीं गये । प्रथम ही प्रथम महाराजकी दृष्टि मुनिवर धर्मघोष पर पडी। तत्काल वे दोनो दंपती उनके पास गये । भाक्तपूर्वक उनके चरणोंको नमस्कार किया । एवं अति विनयसे महाराजने यह पूछा____ प्रभो ! समस्त जगतके उद्धारक स्वामिन् ! मेरे शुभोदय से आप राजमंदिरमें आहारार्थ गये थे। किंतु आप विना आहारके ही चले आये । मैं यह न जान सका क्यों तो आप राजमंदिरमें आहारार्थ गये और क्यों लौट आये ? कृपा Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035265
Book TitleShrenik Charitra Bhasha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGajadhar Nyayashastri
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year1914
Total Pages402
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size23 MB
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