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________________ -warrrrmmmmmmmmmmmmmmmmm ( २२३ ) इधर मुनिराजका तो राजमंदिर में प्रवेश हुवा । और इधर राजा सुमित्रकी सभामें राजा वैर का एक दूत आ पहुंचा। दूतमुखते समाचार सुन राजा सुमित्र अति व्याकुल हो गये। चित्तकी घबडाहटसे वे मुनिराजको न देख सके । अन्य किसी ने मुनिराजको आहार दिया नहीं। इसलिये अपना प्रवल अंतराय जान मुनिराज तत्काल वनको लौट गये । एवं उन्होंने दो पक्षका प्रोषधव्रत धारण करलिया। ____जब दो पक्ष समाप्त हो गये तो फिर मुनिराज आहारको आये । और उसीतरह समस्त ग्रहस्थोंके घर घूम कर वे राजमंदिर की ओर गये । ज्योंही मुनिराज राजमंदिरके पास पहुंचे त्योंही राजा सुमित्रके हाथीने बंधन तोड दिया । एवं जनसमुदायको व्याक़ल करता हुवा वह नगरमें उपद्रव करने लगा इसलिये इस भयंकर दृश्यसे अपना भोजनांतराय समझ मुनि राज फिर वनको लौट गये। उस दिन भी उनको आहार न मिला । एवं वनमें जाकर फिर उन्होंने दो पक्षका प्रोषध व्रत धारण कर लिया। प्रतिज्ञाके पूर्ण हो जानेपर मुनिराज फिर भी दो पक्ष वाद नगरमें आये। गृहस्थोंके घरोमें आहार न पाकर वे राज मंदिरमें आहारार्थ गये । इधर मुनिराजका तो राज मंदिरमें आगमन हुवा। और उधर राजमदिरमें बड़े जोरसे अमि जल उठी । आमज्वाला देख राजा सुमित्र आदि घब Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035265
Book TitleShrenik Charitra Bhasha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGajadhar Nyayashastri
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year1914
Total Pages402
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size23 MB
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