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________________ और सब नीचे रख जाते हैं यहांसे को० २ पहाड़ है सवारी सब तरहोंकी जायहै पहाड़पर सड़क बनौ है को० ७ को चढ़ाइहै आवु नाम सहर उपर वसे हैं सरकारी छावनौहै वहांसे को० १ उपर जाना पानी रस्ते में मिले हैं। १-५० देवलवाड़ा ग्राममें आवुजीका तीर्थ है जिनिस सब मिले हैं कारखाना भण्डारहै ध० है मं० भ० के कइहै संगमरवर पत्थरके सपेद एकरंग तीसपर कोरनी नकासी इस कदर लोदी है ऐसी कही नहीं है बडी कारीगरोका काम बना लिखनेको असमर्थ है अरबों रूपएके लागतका मंदिर बना है देखने योग्य अपूर्व स्थान है यहां इच्छा मुजब रहते है २।४ दिन वहांसे को० ३ और जपर जाना २-५० अचलगड ग्रामहै जिनिस मिले हैं कारखाना भंडारहै रातको रहना हो है इच्छा मुजब वहां ध० म० भ० काहै चौमुखजौकी मूरते ४ । १४४४ मन सोनेकौ है और १० मूरते बडी बडी सोने को है अपूर्व ऐसी मूरते कही नहीं है प्राचीन ८ मूर्ते कावसग मुद्राको है २ पद्मासन की है। यहांसे पीछे नीचे धरमशालामें जाना। ३-५० वहांसे कुंवारोग्राम को० ७ खुशको रस्ता, बैलगाड़ी जातीहै जिनिस सब मिलती है ध० म० भ० के ५ हैं जिस पुण्यवानने आवुजौ पर मंदिर बनाएहैं उन्होंने यहवी मंदिर बड़े भारी बड़ी बागतके बनाएहै देखने योग्यहै यहांसे पीछे भावु आना यहांसे रेलपर बैठकर पालनपुर जाना। मौ० ३२ मा० ।) ५१ पालनपुर टेशन उतरना सहरहै ध० म० भ० के हैं ॥ यहांसे रेलपर बैठकर सिधपुर जाना। मौ० १९ मा०) ५२ सिधपुर टेशन उतरना सहरहै ध० म० भ० केहैं ॥ यहांसे रेल पर बैठ कर महसाने जाना। मो० २१ मा०) Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035250
Book TitleSarv Tirtho Ki Vyavastha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShitalprasad Chhajed
PublisherShitalprasad Chhajed
Publication Year1893
Total Pages42
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size3 MB
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