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________________ [१] असू० (Js.) जैन सूत्राज (S. E. Series, Vols. XXII & XLV ). जम्बू० जम्बूकुमार चरित (माणिकचन्द्र प्रन्थमाला, बम्बई) जैसाइं०-प्रो०एस० भार शर्मा कृत जैनीज्म इन साउथ इंडिया। टॉरा०-टॉडसा• कृत राजस्थानका इतिहास वेङ्कटेश्वर प्रेस । डिजेवा०= ए डिक्शनरी नाफ जैन बायोग्रेकी' श्री उमरावसिंह टॉक (बारा)। तक्ष ='ए गाइड टू तक्षशका'-सर जॉन मारशळ (१९१८)। तत्वार्थ-तत्वार्थाधिगम्सुत्र श्री उमास्वाति S. B.J. Vol.1 तिप = तिल्लोय पण्णत्त' श्री यति वृषभाचार्य (बैन हितेषी मा० १३ अंक १२)। दिजै०='दि० जैन मासिक पत्र सं. श्री. मुलचन्द किसनदास कापडिया (सूरत)। दीनि=०दीवनिकाय' ( P. T. S.) नाच =नायकुमार चरिउ ( माणिकचंद्र ग्रंथमाला, बम्बई)। परि० परिशिष्ट पर्व-श्री हेमचन्द्राचार्य । प्राजैछेसं० चाचीन जैन लेख संग्रह कामताप्रप्ताद जैन (वर्धा)। प्रसा० उपचनसार, प्रॉ० ए०एन० उपाध्ये द्वारा संपादित बंबई। पविमो जैस्मा बंगाल, बिहार, मोडीसा जैन स्मारक-मी.. ब्रह्मचारी शीतळप्रसादजी (सूरत)। बजैस्मा बंबई प्रांत के प्राचीन जैन स्मारक व शीतलप्रसादनी। बुइ-बुद्धिष्ट इंडिया प्रॉ० होस डेविड्स । बुस्ट -बुद्धिस्टिक स्टडीज, डा. विमचरण लॉ द्वारा संपादित कलकत्ता। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035245
Book TitleSankshipta Jain Itihas Part 03 Khand 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamtaprasad Jain
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year1937
Total Pages174
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size3 MB
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