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________________ [१२] कच० - करकण्डुचरिय, प्रॉव्हीराकाळ द्वारा संपादित ( कारखा) । कुरेइं० = कृष्णस्वामी ऍगरकृत ऐन्शियेन्ट इंडिया (लंदन १९१९) 0= गुसापरि०= गुजराती साहित्य परिषद् रिपोर्ट- सातव ( भाव-नगर सं० १९२२ ) । गौबु० 'गौतमबुद्ध' के० जे० सॉन्डर्स ( H. L. S . ) गैब ० = गजेटियर ऑव बम्बई, भाण्डारकर व्यादि कृत । गेमकु० गैज़ेटियर ऑव मैसूर एण्ड कुर्ग । 0 0 चमभ० = ' "चन्द्रराज भण्डारी कृत भगवान महावीर' | जवि ओसो० = जनरल बाफ दी बिहार एण्ड ओडीसा रिसर्च सोसाइटी' | जम्बू ० = जम्बूकुमार चरित्र ( सूरत वीराब्द २४४० ) जमीसो० = जर्नल ऑफ दी मीथिक सोसाइटी - बेंगलोर । जराएसा० = जर्नल ऑफ दी रायक एसियाटिक सोसाइटी - लंदन | जैका०=' जैन कानून ' ( श्री० चम्पतरायजी जैन विद्यामा ० बिजनौर (१९२८ ) । बैग ० = " ० ' "जैन गजट ' अंग्रेजी ( लखनऊ ) | जैप्र० - जैनधर्म प्रकाश ब्र० शीतलप्रसादजं) (बिजनौर १९२७) । जैस्तू • = जैन स्तूप एण्ड मदर एण्टीकटीज ऑफ मथुरा - स्मिथ । जैसासं० = 'जैन साहित्य संशोधक' मु० जिनविजयजी (पूना) । जैसिभा० = जैन सिद्धान्त भास्कर श्री पद्मराज जैन (कलकत्ता) । जैशि सं०' जैन शिलालेख संग्रह'- प्रो० हीरालाल जैन (माणि-कचन्द्र प्रन्थमाळा । जैहि० = जैन हितैषी सं० पं० नाथूरामजी व पं० जुगल किशो-रजी (बम्बई ) । • Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035245
Book TitleSankshipta Jain Itihas Part 03 Khand 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamtaprasad Jain
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year1937
Total Pages174
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size3 MB
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