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________________ अत्यन्त वेग से किसी अन्य बिन्दु की अोर वेगपूर्वक जा रहा है, वह बिन्दु किस प्रकार जाना गया ? तथा इस गति का वेग कितना और किस प्रकार निश्चित किया ? तथा 'अपने समस्त परिवार के साथ' इसका क्या तात्पर्य है ? १६-सूर्य गतिशील है, इसका क्या प्रमाण है ? १७-पृथ्वी २३।। डिग्री का कोना बनाकर सूर्य के पास पास घूमती है, यह कैसे निश्चय किया गया ? १८-२३।। डिग्री का ज्ञान के से हमा? इससे अधिक या कम क्यों नहीं? १६-पृथ्वी २३।। डिग्री से अधिक या कम कोना नहीं बनाये ऐसा नियन्त्रण किसके आधार पर होता है और कौन करता है ? २०-पदि पृथ्वी सचमुच हो वेग से घूमती हो, तो वायु का वेग कितना अधिक रहेगा और वह भी पश्चिम से पूर्व की ओर ही रहना चाहिये। २१-चन्द्रमा अपनी धुरी पर घूमता है और पृथ्वी भी अपनी धुरी पर घूमती है तो चन्द्रमा का एक ही भाग सदा क्यों दिखाई देता है ? Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035208
Book TitlePruthvi ke Akar evam Bhraman ke Vishay me Samikshtmak Prashnavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAbhaysagar
PublisherJambudwip Nirman Yojna
Publication Year1968
Total Pages26
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size5 MB
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