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________________ आगम (४०) भाग-5 "आवश्यक- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 3 अध्ययनं [४], मूलं [सूत्र /११-३६] / [गाथा-१,२], नियुक्ति : [१२४३-१४१५/१२३१-१४१८], भाष्यं [२०५-२२७] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्तिः एवं जिनभद्रगणिरचिताचूर्णि: 3 प्रत सुत्रांक + गाथा: ||१२|| प्रतिक्रमणासंभवं समोतारेतब्बो ॥ एतागि एगविताणि भणिताणि । इदाणि कह पडिकमितवति भण्णति आलोच. ध्ययने आलोयण ॥ १२५७ ॥ एस्थ मालागारेण दिद्वतो, जथा-एगो मालागारो अप्पणच्चयं आराम निच्चकाल तिसम्झं नाया | आलोकेति-पुष्पाणि संति?,न सैति', सुक्ख मधुरं वा इमं एवमादि, पच्छा आलुंचति,मज्जायाय हुँचति-गेण्हतित्ति, एवं गहिताणिमालाकार। ॥६२॥ पच्छा वियडीकरेति, कई, विभत्ताणि करति, मउलाणि बिभत्ताणि, फुल्लाणि विभत्ताणि, चिरेण जाणि फलिहिति तांणि वि-IA । भत्ताणि करेति, खाराणि न उक्खणति, पच्छा नगरे बीहीए जत्तियाओ पुष्फजातीओ ताओ विभत्ताओ करेति, गाहताणुवढवेति, इतराणि च जेत्तिगाणि से अस्थि ताणं दाम दामं उप्पि करेति, कइगा दट्टणं किणंति, सो फलं लभति, अण्णो विवरीतं,णालोएति एमेव नालुंचति न गेण्हति न वा वियडीकरेति,उदाहरिएणं करंडेणं अच्छति,सो फलं न लभति । एवं साधुणावि उच्चारपासवणभूमीओ पडिलेहेत्ता णियाघाते काउस्सग्गे ठाइतब्ब, तत्थ सज्झायं अणुपेहेति, जाहे आयरिया ठिता ताहे ठितो व आवस्सग अणुप्पेहेति, सो साधू मुद्दपोत्तियमादि कातूणं सवं आलोकेति जाव इमो काउस्सग्गोत्ति, पच्छा आढुंचति गेहति इमो एरिसो२|ति अवराहो, पच्छा आलोयणाणुलोम पडिसवणाणुलोम च करोति,पच्छा वंदितूण सरसरस्स साहति,ताहे ओदइयस्स भावस्स सोहील | भवति, पुणो खओबसमिए ठितो भवति, एस विधी, एवं आलोयिए आराहगो, अणालोइए भयणा, कह?, 'आलोतणापरिणओ | सम संपट्टितो गुरुसकासं। जदि अंतरा उ कालं,करेज्ज आराहओतहवि॥१॥ जथा पण्णत्तीए आलापगो, जे पुण-इडीए लागारवर्ण बहुस्सुतमदेण वावि दुच्चरितं । जे न कहति गुरूणं नहु ते आराहगा भणिताशाएवं भयणा भणिता । एवं- ॥६ आलोयणमालुंचण वियडीकरण च भावसोभी य । उभयो कालं मुणिणा सातियारेण कातब्ध।।१।।निरतियारेणवि एवं दीप अनुक्रम [११-३६] CRETARSCIEO (75)
SR No.035055
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 06 Aavashyak 3 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages343
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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