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________________ आगम (४०) भाग-5 "आवश्यक- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 3 अध्ययनं [४], मूलं [सूत्र /११-३६] / [गाथा-१,२], नियुक्ति : [१२४३-१४१५/१२३१-१४१८], भाष्यं [२०५-२२७] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिताचूर्णि: 3 प्रत सुत्रांक ध्ययने । + गाथा: ||१२|| है मंजूसाए पक्खिविऊण समुद्दे छुढा, ते किच्चिरस्सवि उच्छलिया, एगेण दिडा मंजूसा, गहिता, मणूसे पेच्छइ, ताहे पुच्छह- कति- निन्दायां प्रतिक्रमणा च्चो दिवसो छूढाणं 1, एगो भणति चउत्थो दिवसो, सो कह जाणति?, तहेव वितियादणे कहेति-तस्स चाउत्थजरो तेण जाणति। का अण्णं कहेह, दो सवत्तिणीओ, एक्काए रयणाणि अस्थि, सा इयरीए ण विस्संभइ, मा हरेज्ज, ततो णाए जत्थ निक्खमंती पवि-16 दारिका संती य पेच्छति तत्थ घडए छोण ठबियाणि, आलित्तो घडो, इयरीए विरहं गाउं रयणाणि हरियाणि, तहेव घडओ ओलित्तो, इयरीए णायं हरियाणित्ति, तो कहं जाणइ ओलित्तए हरियाणित्ति, वियदिणे भणइ-सो कायमओ घडओ, तत्थ ताणि परिभासंति, | हरिएमु णस्थि । अण्ण कहेहि,भणइ-एगस्स रणो चचारि पुरिसरयणा,तं नैमित्ती रथकारो सहस्सोधी तहेव विज्जो य । दिपणा चउण्ह कण्णा परिणीया णवरमेहेण ॥शाकह?, तस्स रष्णो अइसुंदरा धूया, सा केणवि विज्जाहरेण हडा, ण णज्जा कतोचि अक्खिचा, रण्णा भाषीयं- जो कण्णगं आणेति तस्सेव सा, तओ नेमित्तिएण कहितं- असुगं दिसं नीता, रहकारेण आगा-18 सगमणो रहो कतो, ततो चत्वारिवि तं विलग्गिऊण पधाविया, अंमतो बिज्जाहरो, सहस्सजोधिणा सो मारितो, तेणं मारिज-ल तणं दारियाए सीसं छिण्णं, विज्जेण संजीवणासहीहि उज्जिवाविता, आणिता घरं, राइणा चउण्हवि दिण्णा, दारिया भणति- किही अहं चउण्हवि होमि, तो अहं अग्गि पविसामि, जो मए समं पविसति तस्साह, एवं होतुत्ति, ए समं को अग्गि पविसति, किस्स सा दातव्या । बितियदिणे भणति-निमिचिणा निमित्तेण णातं जहा एस न मरातित्ति तेण अन्भुवगतं, इतरेहि नेच्छित, ९॥ दारियाएवि तहाणस्स हेडा सुरंगा खाणिता, तत्थ ताणि चितगाए णुवणाणि, कट्ठाणि रयिताणि, अग्गी दिष्णो जाहे ताहे ताणि सुरंगाए निस्सरिताणि, तस्स दिण्णा । अण्णं कहेहि, सा भणति- एगार अविरतियार पगतं जंतियाए कड़गा मन्गिता, ताए। दीप अनुक्रम [११-३६] (72)
SR No.035055
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 06 Aavashyak 3 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages343
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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