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________________ आगम (४०) भाग-5 “आवश्यक"- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 3 अध्ययनं [३], मूलं [१] / [गाथा-], नियुक्ति: [११११८-१२२९/११०३-१२३०], भाष्यं २०४] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिताचूर्णि: 3 प्रत सूत्रांक [१] वन्दनाध्ययन चूर्णी CROCOCCES ॥२०॥ दीप अनुक्रम पुण णए फुसंति एताए दिसाए विभासितब्वाणि । तत्थ दब्वखमा जो असमत्थयाए सहति, भावखमा संसारभया परस्स पीडा ण कचव्यत्ति सहति, दबसमणा णिण्हगादी, भावसमणा जे सम्भाविएम अहिंसादिसु जतंति, भावखमाए भावसमणेण य अधिकारो। वंदणगं कातुं वंदितुं, बंदणगं पुग्वं भणित, जावनिज्जाए निसीहियाए, दबजावणिया जै दव्यं केणति पयोगेण जाविज्जति बाहिज्जति, जथा उग्गमणमादीहिं मंडिमादीणि वाहिज्जति, भावजावाणज्जा भाषो जाविज्जति, दुविहाए अधिगारो । दबनिसीहिया सरीरं, भावनिसीहिया निसहकिरिया, दुविहाएवि अधिकारो। अणुण्णा छब्दिहा विभासितन्ना, सेवाणुष्णाए अधिगारो । एवं अव्वाचाधादीणिवि सवित्थरं विभासज्जा । इदाणि चालणापसिद्धीओ भण्णंति, तत्थ आह--णणु किमिति पढम पवेसे वंदित खामेतुं पुणोवि य पवेसेण वंदतिी, उच्यते-लोग जथारायादीणं दतादयो बहुमाणाणुरागेण पुण्यं पणमितूण कुसलयट्टमाणि आपुच्छिय खामेचा पूणो पुणो पणमति पुच्छति खाति, ततो पणमित्ता बच्चंति, एवं लोगुत्तरेवि बहुमाणो, भत्तीए पुचि बंदणपुरस्सरं विण्यं पर्युजिता पच्छा खाति आवस्सिगमादि, पुणरवि पणमति। तहेव पुणो आह-जदि तुम्भ वाहगं काहगं च जोग एकत्थ करे ता दोकिरियपसंगो होति, निवारियाओ सुने दो किरियाओ एकदा बहुसो, तो एवं करेतु सव्यं पकवितूण तुहिको आवत्तादी करेतु, एवं सेय, आयरिओ भणति-तुम सिद्धृत न गाणसि, जदा भिण्णविसया भोगा होति तदा एकदा णिसिद्धा, जथा अणुप्पेहाति य वकमतीया, णो पुण एगलक्खधा भोगे, दिहिवादे एगमि काले बायाए उच्चारेति कारण य भंगे करेति । | मणेण य तदुवउत्ते, एवं अम्ह एगमि वेणहए पयोगे दोकिरियादोसा न होतित्ति । अण्णे पुण एवं परिहरति, जथा किर एगमि समए दोसु किरियासु उवयोगो निसिझति, न पुण किरियामेनं, जतो तिण्डवि जोगाणं जुगवसंपातो दिट्ठो भंगियसुवादिसुचि। [१०] M॥५०॥ (63)
SR No.035055
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 06 Aavashyak 3 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages343
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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