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________________ आगम (४०) पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [०१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिताचूर्णि: 3 प्रत सूत्रांक [१] बुन्दनाध्ययन चूणों ॥४१॥ दीप अनुक्रम [१०] कमणे बंदिता आलाएंति एक, वितिय जे अम्भुत्थितावसाणे मज्झे दति, मज्झदणए कति वंदितव्या, जहण्णेणं पन्दनतिण्णि मज्झिमेणं पंच वा सत्त वा उकोसेण सब्वेचि, जदि वाउला बक्खेबो वा तो एगेण ऊणगो दोहिं तिहिं जाय तिण्णि अवस्सा शवंदितव्वा, एवं देवसिएवि, पक्खिते पंच अवस्स, चातुम्मासिए संवत्सरिए य सत्त अवस्सं, ते वंदितूण जं आयरियस्स अल्लिवि ज्जति तं ततिय कितिकर्म, पच्चक्खाणे चउत्थं कितिकम्मं । तिणि सज्झाए-बंदिसा पट्ठवेति पढम, पढविते पवेयंतस्स वितियं, |पच्छा पढति, ततो जाहे चउम्भागावसेसा पोरिसी ताहे पादे पार्डलेहिति, जदिन पढति तो वंदति, अह पढति तो अचंदित्ता पातं पडिलेहेतूणं पच्छा पढति, कालवेलाए पंदितुं पडिकमति, अह उग्घाडकालियं न पढति ताहे वंदितुं पाए पडिलेहिति, एतं ततियं, एवं पुवण्हे सत्त, एताणि अम्भचद्वितस्स नियमा, भत्तद्वितस्स पच्चक्खाणं अम्भहितं, एताणि अवस्स चोद्दस । इमाणि कारणिजाणि उद्देससमुद्देसअणुग्णवणासु सत्त, विगति आयंबिल काउस्सग्गे परियट्टिएँ समाणे । उवसंपज्जणअवराधविहारा उत्तिमट्ठालोयणाए य ॥१॥ एतेसुवि दो दो बंदणगाणि, अवराधसंवरणआपुच्छणाकालप्पवेयणादिसु एककं, अवराधो गुरूणं कतो तपि बंदित्ता खामेति, पक्खियवंदणगाणिबि अबराहे पडंति, पाहुणगत्ति एत्थ भण्णति-पाहुणगाणमागताणं वंदणगं दातब्वं वा पडिच्छितब्वं वा, तस्व को विधी', जदि संभोइया तो आयरिए आउच्छित्ताणं बंदंति, अह न संभोइया तो अप्पणगं आयरियं वैदित्ता संदिसावेत्ता बंदति,एवं उभयपक्खेऽपि । आलोयणंति,जाहे विहारालोयणा अवराहालोयणा वा उपसंपज्जणालोयणा ॥४१॥ बा, संवरणं वेतालियं अंतरा बा, भन्न गहिते इच्छा जाता अज्ज अभत्तटुं करेमिति,अहवा न जीरातत्ति भत्तहुँ लाएमि एवं संवरणं, पवमादिसु,उत्तिमई भत्तपच्चक्खाणं कातुकामो संलेहे वोसिरणे एवमादिसु विभासा । कतिखुत्तोत्ति गत|कतिओणयति दारं, (54)
SR No.035055
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 06 Aavashyak 3 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages343
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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