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________________ आगम (४०) भाग-5 "आवश्यक- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 3 अध्ययनं [४], मूलं [सूत्र /११-३६] / [गाथा-१,२], नियुक्ति : [१२४३-१४१५/१२३१-१४१८], भाष्यं [२०५-२२७] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिताचूर्णि: 3 प्रत सूत्रांक + गाथा: ||१२|| प्रतिक्रमणा ॥१॥सो वानरजूहवती चिंता य सोभणा जाता, साधुणा य कहितं तेहिं गतिदिएहिं,सहस्सारे उपवण्णो,सो य साहरितो १९॥ प्रणिध्याध्ययने संवरण जोगा संगहिता भवति, तत्थ पडिबक्षण उदाहरण-रायगिहे सेणिएणं बद्धमाणसामी पुच्छितो, एक्का देवी नट्ट- दमो ॥२०२॥ विधि उपदसत्ता गता, का एसत्तिः, सामी भणति-वाणारसीए भइसेको जुण्णसट्ठी, तस्स भज्जा नंदा इति, तीसे धूता सिरी, सानी ४ा बडकुमारी वरकपरिवज्जिता, तस्स कोढए चितिए पासस्सामी समोसढो, सिरी पन्चइता, गोवालीए सीसिणिका दिण्णा, सा संग्रहाः हैपुवं उग्गेण विहरिना पच्छा ओसण्णा जाता, हत्येण पादे धोचति जथा दोवती विभासा, वारिज्जंती उद्धेतूण अण्णत्थ गता है। १९-२१ विभत्ताए बसहीए ठिता, तस्स ठाणस्स अणालोइयपडिक्कंता चुल्लहिमवते पउमे दहे सिरी जाता देवगणिका, एताए ण संवरो कतो, पडिवक्खा कातब्बो, अण्णे भणंति- हत्विणिकारूवेण वाउक्काएति, ताहे सेणिएणं पुच्छित २०॥ अत्तदोसोवसंहारो कातब्बो,जदि किंीच काहामि तो दुगुणो धो होहितित्ति,तत्थ उदाहरणं-बारमतीए अरहमित्तो सेट्ठी, अणुधरी भज्जा, सावकाणि, जिणदेवो पुत्तो, तस्स रोगो उप्पण्णी, ण तीरति चिगिच्छितुं, वेज्जा भणंति-मांस खाहि, सो| |णच्छति, सयणपरियणो अम्मापियरो य पुतणेदेणं अणुजाणंति, सो णेच्छति, किह चिररक्खितं बतं भजामित्तिा, उक्तं च| वरं प्रविष्ट ज्वलितं हुताशनं, न चापि भग्नं चिरसंचितं व्रतम् । बरं हि मृत्युः परिशुद्धकर्मणा,न शीलवृत्तस्खलितस्य जावितम् ॥१॥ अचदोसोवसंहारो कतो, मरामित्ति सच सावज्ज पच्चक्खात, कहवि पउणो तहावि पञ्चकखातं चेव, पन्वज्जा कता, इतो सुहावसाणस्स णाणमुप्पणं जाब सिद्धोत्ति २१॥ IM॥२०२॥ सव्वकामेसु पिरज्जितव्वं,तत्थ उदाहरणं-उज्जणीए देविलासत्तो राया,तस्स भज्जा अणुरत्ता लायणा णाम,अण्णदास CMSADHA दीप अनुक्रम [११-३६] (215)
SR No.035055
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 06 Aavashyak 3 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages343
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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