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________________ आगम (४०) । भाग-5 "आवश्यक- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 3 अध्ययनं [४], मूलं [सूत्र /११-३६] / [गाथा-१,२], नियुक्ति : [१२४३-१४१५/१२३१-१४१८], भाष्यं [२०५-२२७] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्तिः एवं जिनभद्रगणिरचिताचूर्णि: 3 प्रत सूत्रांक [सू.] + गाथा: ||१२|| प्रतिक्रमणा निज्जरा अस्थि अरहता एवं चक्कचट्ठी बलदेवा वासुदेवा चारणा विज्जाहरा गरगा णेरड्या तिरिक्खजोणी तिरिक्खजोणिया उपासकध्ययने माता पिता रिसयो अरिसयो देवा जाव अस्थि देवलोगा अस्थि सिद्धी अस्थि असिद्धी अस्थि परिनिन्बाणे अस्थि परिनिव्वुत्ता प्रतिमाः | अस्थि पाणातियाते जाव अस्थि मिच्छादसणसन्चे अस्थि पाणातिपातरमणे जाव अस्थि राइभायणवरमणे अस्थि काहविवेगे जाव ॥१२१॥ अस्थि लोभविवेगे अस्थि पेज्जविवेगे जाव अस्थि मिच्छादसणमन्नविवेगेनि, जिणपत्रत्ता भावा अवितहं सद्दहति तस्स णं एग वा मा अणेगाई वा अणुब्बताई णो कताई भवतीति पढमा उवासगपडिमा १॥ अथावरा दोच्चा उ० देसणसावए यावि भवति, तस्स ण एवं मवति-अस्थि लोगे जाच जिणपण्णता भावा अवितई सद्दहति, तस्स गं एग वा अणेगाईच अणुबताई भवंतीति ट्र! दोच्चा उ०२ अहावरा तच्चा उदेसणसावए यावि भवति, तस्सणं जाव सद्दहति, तम्स णं एग अगाई वा अणुव्यताई कताई भवति । सामाइयं संम अणुपालेति जाव तिमि मासा एतगुणा धारतित्ति तच्चा उ०३ ।। अहावरा चउरथा उन्दसणसा. जथा तच्चा जाव |' सामाइयं सम अणुपालंति, चाउसिअट्टमुदिट्ठपुणिमासिणीसु पडिपुण्णं पोसह सम्मं अणुपालेनि जाव चत्वारि मासा एते गुणा धारेतिति चउत्था उ०४॥ अधावरा पंचमा उ० देसणसावए जथा चउत्था जाव पोसह संमें अणु० रातिभत्ते से परिणाते भवति सचिचाहारे से णो परिण्याते भवति जाब पंच मासा एते गुणा धारेतित्ति पंचमा उ०५॥ अहावरा छट्ठा उ० सण जथा पंचमाए तहेव जाव रातिभत्ते से परिणाते भवति सचित्ताहारवि से परिणाए भवति जाव छम्मासा एते गुणा धारोतत्ति ॥१२॥ छट्ठा उ०६॥ अहावरा सचमा उदंसण जथा छट्ठाए तहेव रातीमत्तपरिणाते सचिचाहोर परिणाए दिया भचारी रातो परि-II माणकडे जाव सन मासा एते गुणा धारेतित्ति सत्तमा उ०१॥ अथावरा अट्ठमा उ० दंसणसावए यावि भवति जाव पडिपुणं ४ * दीप % अनुक्रम [११-३६] % - *- (134)
SR No.035055
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 06 Aavashyak 3 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages343
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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