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________________ आगम (४०) भाग-3 “आवश्यक"- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 1 अध्ययनं मूलं - गाथा-], नियुक्ति: [४७९/४७९], भाष्यं [११४...] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र-[४०].मूलसूत्र-[२१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि:-1 प्रत सत्राक दीप अनुक्रम दारअगणी णववाले हलिदु पडिमा अगणी बहिया ।। ४-२२१४०९।। चेटत्रासादि आवश्यक ततो गंगला गाम गामो, तत्थ गतो, सामी वासुदेवघरे पडिम ठितो, सोवि ठितो, तत्थ चेडरूवाणि खालंति, सो या उपोषात कंदप्पिओ, ताणि अच्छिकणिवाणियाएहिं बीहावेति, ताहे ताणि धावताणि पडंति, जाणूणि य छोडिजिंति, अप्येगतियाण 3I नियतीति खुखषगा हिज्जंति, पच्छा तेसि अम्मापियरो एंति, तेहि सो पिट्टिज्जति, अने भणति-एयस्स देवज्जगस्स एस पूण दासो व ठाति अप्पणो ठाणे, अने बारेति-अलाहि, देवज्जगस्स खमियब्ब, पच्छा सो भणति-अहं हमामि तुम्भ ण वारेह, ताहे सिद्धत्यो भवति-1 ॥२८॥ 13 तुम एकज्जो ण अच्छसि । ततो पच्छा आवचा जाम गामो, तत्थवि सामी पडिमं ठितो बलदेवस्स परे, तत्ववि पहं अवयातेतु दाबीहावेति, अविय पिडतिवि, ताकि चेहरूपाणि रुवताकि मायापितूर्ण साहेति, तेहि पवितो सुक्को य देवज्जगस्स गुणेणं, तस्थ पुणोऽवि भणति-तुम्मे ममं ण वारेह, सिद्धस्थो भणति-तुम एकज्जो ण ठासि, अन्ने भणीत-तेसिं चेडरूवाणं अम्मापितीहिं नजाति४. भट्टारगो, एतस्स दोसो जो ण चारेति, तेहिं बाहाहि गहितो, अच्छामोत्त, ताहे बलदेवरूपेण अहासाभिहिता देवता उद्धाहता, है ततो पायवाहिताणि सामि खामेति । एत्थ तत्तो पणंगलाए, डिंभ मुणी अच्छिकट्टणं चेव । आवत्ते मुहयासे, मुणिओत्ति य पाहि बलदेवो।। ४-२०४८०॥ II ततो पच्छा चोरायनाम सैनिवेसं गतो, तत्थ घडाभोज्यं तदिवस रज्मति य पच्चति य, सामी य एते परिम ठितो, सो ४ ॥२८९॥ भणति-अज्ज एत्थ चरियचं, ताहे सिद्धत्थो भणति-अज्ज अम्हे अच्छामो, सो तहिं उपद्दनिउडियाहिं पलोएति कैवलं देस INI [301]
SR No.035053
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 04 Aavashyak 1 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages320
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size25 MB
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