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________________ आगम (४०) भाग-3 “आवश्यक"- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 1 अध्ययनं H मूलं - /गाथा-, नियुक्ति: [४७२/४६८], भाष्यं [११४...] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र-[४०].मूलसूत्र-[२१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि:-1 प्रत दीप अनुक्रम श्री लोगो वाहेहिति, एत्थ चेव अच्छंतु, ताहे से फासुगा चारी किणिऊण दिज्जति, एवं पोसेति, सो य सावतो अवभिचाउइसी पुष्यसामुआवश्यक उपवास करेति, पोत्थय च वाएति, तेचि तं सोऊण भया जाता, उपसंता संता समिणो जदिवसं सावओं म जेमेति तदिवस | तेवि ण चरंति, तस्स सावगस्स भावो जातो, जहा इमे भविया उवसंता, अन्भहितो हो जातो, ते रूवस्सियो, तस्स यतावास मिचो, तत्थ मंडीरवडजत्ता, वारिसा गस्थि अन्नस्स बइल्ला, ताहे तेण ते भंडीए जोतेत्ता पीया अणापुच्छाए, तस्य अमेणावि जाइज्जंता तस्स दिना, ताहे ते छिन्ना आणेउ बद्धा, तत्थ ते णवि चरति णवि पाणितं पिबंति, जाहे सञ्चहा ण इच्छति ताहे ? ॥२८॥ सो सावतो तेसिं भत्तं पच्चक्खाति णमोकार च से देति, ते कालमासे कालं किच्चा णागकुमारेसु उववन्ना, ओधि पउंति जाप पेच्छंति तित्थगरस्स उबसग्ग, अलाहि ताण अनेणं, सामी मोएमोति आगता, एगेण णावा गहिता, एगो मुदाढेण समं जुमति, सो महिद्धीओ, तस्स पुण चयणकालो, इमे य अहुणोववनगा, सो तेहि पराजितो, ताहे ते नागकुमारा तित्थकरमहिम करेंति, दास रूवं च गायति, एवं लोगोऽपि । ततो सामीवि उत्तियो, तत्थ तेहिं देवेहि सुरभिवास वुटुं, तेवि पडिगता, एस्थ गाहाओ-18 सुरभिपुर सिद्धदत्तो गंगा कोसी विद य खेमिलओ। णाग सुदाढे सीहे कंबलसबला य जिणमहिमा ।४-१२।७३ मधुराए जिणयासो आहीर विवाह गीण उववास | भंडीर मित्त पंधे भत्ते णागोहि आगमणं ॥४-१३।४७४ा । परिवरस्स भगवतो णावारूढस्स कासि उवसग । मिच्छादिहि परद्धं कंबलसबला समुत्तारे ।। ४-१४०४७५॥ ॥२८१॥ ततो भगवं उदगतीराए पडिकमित्तु पत्थिओ, गंगामड्डियाए य तेण मधुसित्थेण लक्खणा दीसति, तत्थ पूसो णाम सामुदो । ALSEXGAR [293]
SR No.035053
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 04 Aavashyak 1 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages320
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size25 MB
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