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________________ आगम (४०) भाग-3 “आवश्यक- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 1 अध्ययनं H, मूलं - गाथा-], नियुक्ति: [६,७], भाष्य पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र-[४०] मूलसूत्र-[१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि:-1 | प्रत सत्राक समसेडीए सुणेहतं मीसग सुणोतिचि' बरथ पूण तागि भासादवाणि कवरेण जोगेण मेहति । कतरेण वा णिसरतित्ति, भाषादव्यआवश्यक आयरिओ शाह- . ग्रहणादि चूर्णी गेण्हइ य काइएण॥७॥ मासालद्धीओ जीवो भासागहणपाउग्माणि दवाणि कायजोगण घेत्तूण भासकाए परिणामउं शानानि वयजोगेण बिसिरति, णिसिरह णाम भासाचि बुतं भवति, सो पुण ताणि दुग्याणि एगंतरेण मेहति एक्कन्तरं चणिस्सिरचिति, ॥१५॥ 181 कई?, एमसमएण जया भासापोग्गलागहिया भवति तदा एगेण चैव समएण णिसिरति, एवं महणफिस्सिरणं कार्ड कोइ तमि चेवहितो | भवति, ठिविक्खयं वा करज्जा, एवं गहणानिसिरणाणं कालो जहणेण दुसमइओ उक्कोसणं अंतीमुचितो, व पूण अतामहत्तस्स समया असखेज्जा णायच्या, तेसु एक्कंतरं गेण्हति णिसिरति य, कहं ?, जो भासंतो-णो उबरमति सो जमि समए णिस्सरति तमि चेवर | समए भासं भासतो अण्णाणि भासादष्वाणि पुणो गेहति, घेत्तृण य तइए समए णिसिरति, ताणि य कितियसमयमाहताणि १ तइए समए णिसिरमाणो अण्णाणि भासादब्याणि पुणो गण्हति, ताणि चउत्थे णिसरति, ताणि य तइयसमयगहियकाणि चउत्थ | समए णिसिरमाणो अण्णाणि भासादब्वाणि पुणो गेहति, ताणि पंचमे समए णिसरति, एवं पांतरं गचस्व प्रचंतर गिरिसर-1 तस्स य अम्भतरेसु महुचस्व असंखेज्जा समया भवंति ॥७॥ जाणि पुण ताणि भासादब्याणि गेण्डर काइएण जोगेण तागि पंचाई | सरीराणं कतरेणं येण्हविचिा, एत्थ भण्णातिति INT॥१५॥ तिविहंमि सरीरमि०टातिविहसरीरगहणेण ओरालियवेउब्बियआहारगाणं गहणं कर्य, इयमणि पुण तेसाफम्ममाण वदंरग्स-131 याणि पेन काऊण ण भणियाणि, जस्स ओरालियसरीरं नो जीवपएसेहिं गेण्डिऊण ओरालियसरीरेण णिसिरति, जस्स वेउक्क्यिसरीर REGRESERESERESESEXSISE दीप अनुक्रम [27]
SR No.035053
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 04 Aavashyak 1 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages320
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size25 MB
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