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________________ आगम (४०) भाग-3 “आवश्यक’- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 1 अध्ययनं H, मूलं F /गाथा-], नियुक्ति: [२५७/४४४-४५०], भाष्यं [४५...] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र-[४०].मूलसूत्र-[२१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि:-1 प्रत सुत्रांक चूी प श्री एस पढमो विवि नामेण वासुदेवोचि, जहा वासुदेवजरासंधाणं जुद्ध तहा बनेयम्बं । ते सव्वे रायाणो ओपतिता, ओपवितं श्रीवीरस्य आवश्यक अडं भरह, कोडियसिला बाहाए धारिता लीलाकट्ठ व, एतं रहावत्तपब्बतसमीवे जुद्धं आसी, एवं परिहायमाणे बले कण्हेण किर भवा किहवि जन्नुगाणि पाविता । तिविठू चुलसीति वाससयसहस्सांइ सब्याउर्य पालचा १८ सचमाए पुढीए अपइट्टाणे नरए उपव नो १९ ततो य उच्चट्टित्ता सीहत्ताए २० पुणो नरएसु २१ । ताहे कतिवयाई तिरियमणूसभवग्गहणाई भमिऊण अबरविदेहे म्याए रायहाणीए धणंजयस्स पुत्तो धारणीए कुच्छिसि पियमित्तो णाम चक्कवट्ठी जातो, तत्थ चतुरासीतिं पुण्यसयसहस्साई ॥२३५॥ परमाउयं पालता चक्कवट्टिभोग चइत्ता पोडिलाणं घेराणं अंतियं पब्वइतो, वासकोर्डि परियागं पाउणिचा २२ महामुक्के कप्पे I सम्बद्वे विमाणे देवो जातो, सत्तरससागरोवमाद्वितीतो २३ । 13 .ततो चुत्तो छत्तग्गाए णगरीए जियसत्तुस्स रमो पुत्तो महाए अत्तओणंदणो णाम कुमारो जातो, अचिरेण रज्जे ठवितो, चउ-18 व्वीसं वाससहस्साई अगारवासमझे वसिता पोडिल्लाणं अतियं पञ्चइतो, एक्कारस अंगाई अहिज्जिचा तत्थ मासंमासेणं खममाणोएग वाससयसहस्सं परियागं पाउणित्ता इमेहिं यीसाए कारणींह आसेवितबहुलीकतहिं तित्थगरनामगोयं णिवत्तेति । तंजहा____ अरहंत सिद्ध ॥३॥ २६४ ॥ दसण॥ ३ ॥ २६५ ॥ अप्पुब्ब० ॥ ३ ॥ २६६ ॥ पढम०( ) तंच | कहं० ( ) ॥३॥ २३७॥ नियमा०॥३॥ २६८॥ जहा पदरनाभो, तत्थ मासियाए संलहणाए सहि मचाई । आलोइयपडिकंतो समाहीए कालगतो २४ पाणवे कप्पे पुरफुत्तरवडेंसते विमाणे देवत्ताए उववो २५ तत्थ वीस सागरोवमाणिारा 1 दिखाणि भोगाणि भुजिऊण दीप अनुक्रम [247]
SR No.035053
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 04 Aavashyak 1 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages320
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size25 MB
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