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________________ आगम (४०) भाग-3 “आवश्यक"- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 1 अध्ययनं H. मूलं - गाथा-], नियुक्ति: [१२६/३४६-३४९], भाष्यं [३२-३७] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र-[४०].मूलसूत्र-[२१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि:-1 प्रत HEIGE श्री सखिखिणियाई जाब विजएणं बद्धाति बद्धावेचा एवं बयासी- अभिजिते ण देवा० जाव अम्हे देवाणु० आणत्तिकिंकरित्तिकटु । दिग्जयः आवश्यक +12 समप्येति । तए ण भरहो ते सक्कारेति जाव पडिविसज्जेति, सेस तं चेव. अन्ने भणंति-णमिविनमिणो रायाणो णायाणन्ति, I नवनिधयः चूी ६ द्र तेहिं समं जुद्धं पारस बरिसा, पच्छा ते पराजिता समाणा विणमी इस्थिरयणं णमी रयणाणि य गहाय उवागतत्ति । तए णं से | चक्के णमिविणर्माणं अट्ठाहिताए णिव्वताए समाणीए तहेव जाव उत्तरपुरस्थिनं दिसं गंगादेविभवणाभिमुहे पयाए यायि होत्था । भरहे तहेब जहा सिंधुदेवीए, णवरं सा से कुंभट्ठसहस्म रयणचित्रं जाणामणिकणगरयणभत्तिचित्ताणि य दुवे कणगसीहासणाई ॥२०॥ | उवणेति जाव से चक्करयणे गंगाए महामाहमाए णिवत्ताए समाणीए तहेब जाव दाहिणं दिसिं खेडगप्पवाताभिमुहे पयाए यावि होत्था । तहेव कुटुंबियाणची य हत्थिरयणसेणापडिकप्पणा पोसहमाला गड्डमालगणमीकरण, णवर आलंकारियभंडदाणं सकारगयाए पडिविसज्जणया साहणाणती आणुपुर्षिय यब्बा। तए ण से भरहे गट्टमालगस्स अट्ठाहिताए णिब्बताए समाणीए सेणावति आणवेति- गच्छ णं भो ! गंगाए बिल्लं निक्खुडं जाव ओतवेहि, एवं सिंधुणिक्खुडवत्तब्बया यचा, जाव उप्पि पासादगते विहरति । भरहो तु किल गंगादेवीए समं भाग | भुजति वाससहस्सति । तए णं से भरहे अन्नया कयादी मेणावति आणवेति- गच्छ णं भो ! खडगप्पवातगुहाए उत्तरिल्लस्स दुवाM रस्स कबाडे विहाडेहि, एवं माणियन्वं जाब पियं निवेयणता कोडुबियाणती गुहापवेसो मंडलालिहणा संकमकरणं, णवर ताओ गदीओ पच्चस्थिमिल्लाओ कडगाओ पढाओ पुरथिमेणं गंगाणदि समप्पेंति जाव दाहिणिलस्स दुबारस्स कवाडाण सयमेवार पच्चोसक्कणया, जाव तीसे गुहाए दाहिणिल्लणं दारेणं गीति ससिब्ब महंधकारणियहाओ। तए णं से राया गंगाए णदीए दीप अनुक्रम X446 SECASSESASARAS [213]
SR No.035053
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 04 Aavashyak 1 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages320
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size25 MB
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