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________________ आगम (४०) भाग-3 “आवश्यक’- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 1 अध्ययनं H, मूलं - गाथा-], नियुक्ति: [१२३/२०६-२०९], भाष्यं [५-३०] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र-[४०].मूलसूत्र-[१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि:-1 प्रत ॥१५६॥ 11 काऊण दरिसित पत्तय, भणिता एयारिसयाणि काऊण एत्यं चेव पयह, पच्छा कुसलेहि कालेण सुंदरतरगाणि कयाणि, पच्छा 13/लेखादीनि आवश्यक पाऊण अग्गिमि तहिं पागं करे कति । एवं ता पदम कुंभकारा उत्पन्ना, एवं ता आहारो गतो॥ चूर्णी उपोद्घात - इयाणि सिप्पाणि उप्पाएयवाणि, तत्थ पच्छा बत्थरुक्खा परिहीणा, ताहेऽणंतिका उप्पाइया, पच्छा गेहागारा परिहीणा, नियुक्तो ताहे बड्डती उप्पाइता, पच्छा रोमणखाणि बढति ताहे कम्मकरा उप्पाइता हाविया य, एताई च पंच मूलसिप्पाणि-कुंभकारा | पूचित्तगारा गंतिका कम्मगारा कासवगति । एकेकस्सवि वीस भेया, एवं सिप्पसर्य, एवं ता सिप्पाण उप्पत्ती । इयाणि कम्माणि-तणहारगादीणि, आचार्यकं सिल्पमनाचार्यकं कर्म, ताहे जे रिद्विता मणुस्सा ते विणीयतासमीपत्थे मणुसे. भणंति-ओ' कुसलत्ति, तेण कोसला. कालदोसेण ममचिभावे जाते मामणा, मामणाणाम ममता, मम आसमो वर्ण काननानि, एस | मामणा । विभूसणा णाम जे चव सामी विभूसिज्जंतो दिडो तप्पभिति लोगो आढचो विभूसेउ । लेहत्तिदार-बभीय दाहिणहत्थण लेहो दाइतो, सुंदरीय बामहत्थेण गाणत, भरहस्स चित्तकम्मं उपदिट्ठ, बाहुबलिस्स & लक्षणं थीपुरिसमादणं माण ओमाणं पडिमाणं, एवं तदा पवत्तं । पतिए णाम जै मणिपादओ पोइज्जति, पहणाणि वा तदा उप्पनाणि । अबलवितुमार सु बबहारो तप्पभिति चव आढत्तो। णीतीओ उसभसामिम्मि चेव उप्पनाओ। निउद्घाणि इस्सत्थाणि हाय । ओवासणा णाम कम्मं जे कायव्यं तं तदा आढचाणि वडिउ रोमाणि, पढम ण ववित्था, अहवा उवासणा जं सेवेति इस्सरं ॥१५॥ वा, चिगिच्छावि तदा आढना, पढौ रांगा ण होसु, अत्थसत्था कोडिल्लयमादी तदा उप्पना, बंधे पाते य मारणा, पतं अत्थातो RE दीप अनुक्रम ६ - * ५ [168]
SR No.035053
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 04 Aavashyak 1 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages320
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size25 MB
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