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________________ आगम (४०) भाग-3 "आवश्यक- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 1 अध्ययनं H, मूलं - गाथा-], नियुक्ति: ६३/१४२], भाष्यं । पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र-[४०].मूलसूत्र-[२१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि:-1 प्रत HEI65 यो तेन वा निदेश्यः रहेण रहियो एण्यादि, एस दवनिदेसो । 'खेचनिदेसो जो जं खेसं निरिसति तेक मरह वा एरवयं वा जो आवश्यक दावा जेण खत्रण निदिसति, सं०-सोरहो माग्गहो इच्चादि, कालनिदेसो परुपियथ्यो। समासनिईसो विविही, तंजहा-अगसमासनि-IX निगमब उपाघात देसो सुयक्बंध अज्झयण, अंगसमासणिद्देसो जो जं अंग निद्दिसत्ति, सं०-आयारं वा सुधगडं वा एवमादि, एवं सुयक्खंधपि नियुक्ती माथासोलसागि महज्झयणाणि चा, एवं अज्झवणं जहा दुमपुफियादीणि, उद्देसनिदेसो जो जं उद्देस निदिसति, ०-सत्वपरिभाए ॥१२६॥ पढमो उद्देसो चितिओ वा इत्यादि, भावमिदेसो जो जं भावं निदिसति, सं०--उदइयं वा, जो या जैग बा भावेण निहिस्सति जहा कोही माणी माथी लोभी, इह किल समासउद्देससमासनिदेसेहिं अधिगारो, तत्थ अज्मायणं इति समासुदेसो सामायिकमिति समा18 सनिर्देशः। एते पुण उदेसनिदसे को किह णयो इच्छति इति ?, 'दुविहषि' अम्ने पुण निदेसमेष को किह गयो इच्छतित्ति दुविहंपिणेगमणयो निहिट संगहो य पहारो । निसगमुज्जसुतो उभपसरित्थं च सहस्स ॥२॥६५॥ तत्य गमणयस्स य वत्तम्बयाए इत्थी इत्यि निदिसति इथिनिद्देसो, इत्थी पुरिस निदिसति पुरिसनिदेसो इस्थिनिदेसो या इत्थी पपुसगं निहिसति इत्थीनिःसो य णपुंसगनिदेसो य, एमेव पुरिसणपुंसगाणापि संजोगा। संगहववहारणयवत्तव्यता इत्थी। इत्थि मिधिसति इत्थीनिदेसो, इत्थी पुरिसं निद्दिसति पुरिसनिसो, इत्थी णपसगं निहिसति णपुंसगनिदेसी, एवं पुरिसणसगाणपि दाजोमा, दवं णिदिसति तं संगहयवहारा इपछतिथी इस्थि निसति इथिणिसो इत्थी पुरिसं निहिसति इस्थिनिटेसोर ॥ इत्थी गपुंसग निदिसति इत्थिगिसो, एवं पुरिसणपुंसगाणवि, एवं उज्जुसुओ जो निदेसओ ते इच्छा, सेस व इच्छइति, उमय-II दीप अनुक्रम [138]
SR No.035053
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 04 Aavashyak 1 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages320
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size25 MB
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