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________________ आगम (४०) भाग-3 “आवश्यक- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 1 अध्ययनं मूलं - /गाथा-], नियुक्ति: ६०/?], भाष्यं H पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र-[४०] मूलसूत्र-[१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि:-1 श्री आवश्यक प्रत उपाघात नियुक्ती ॥१२४॥ दीप अनुक्रम हाणी य अवनवादोय, एरिसत्ति अनाओऽविण लमंति, एवं आयरियपि, सीसा पाडिच्छगा करेहिन्ति, पाडिच्छगा सीसशि, चर्चा | गवाभीरीx बितिया पसत्था, बभणस्स दुझिहितित्ति, गावी य पुणो मज्झवित्ति, चर्चा । एवं आयरिए सीसा चिंतेति-कि एतेहिी, अम्हं ।। दृष्टान्तो एस भारो, णिज्जरा, आयरितो य साधण दाही पुणो अम्हांपत्ति, चर्चा । एवं पाडिच्छगावि । भेरी सच्चेव वासुदेवस्स भणिया, जह सा जया सुविसुद्धगुणजुत्ता आसि तदा महग्या आढिता, पच्छा विवरीया, एवं सीसेवि समोतारो। अहवा जहा वासुदेवेण गुणेहिं देवावि अक्खित्ता भेरी य लद्धा एवं सीसो गुणवं गुरुं आराहेति सकज्जं णिकादेतित्ति, चर्चा । आभीरी, आभीरो भंडीए उरि ठितो घयगडं पणामति, हेट्ठा मे महिला पडिच्छति, तीसे इतरस्स य अंतरागण्हंतमुयंताणं | कहमवि पडितो भिन्नो, ताणि भंडंति-तुमे दुग्गहितं, तुमे दुडु पणामितति. ताव सर्व भूमि गयं, परोप्परकोबो वेला फिट्टा अकाले| | गच्छताणं सेसघयमुल्लं चहल्लाय चोरेहि गहिता हाणी अवन्ना य, एवं चेव आलावए आयरिएण दिने अन्नं वा कुढितो भणितो-ण | | एवं, भणइ-तुम चेव एवं दिन्नो, सो भणति-ण देमि, तुम विणासेसिचि, कलहो, एवं समोतारो । बितिओ दवत्ति ओइन्नो, दोहिवि दवदवस्स कप्पराणि भरिताणि, मणागं गहुँ, सो आभीरो भणति-मए ण सुट्टे पणामितं, सा भणति-मए न सुगहितंति, | एवं आयरिएणवि आलावओ दिन्नो, पच्छा आयरितो भणति-मा एवं कुद्देहि, प्रागेव मए आणुवउत्तेण दिन्नो, सो भणति-मते 18 सुट्ट गहितोति, चर्चा । अहवा आभीरी जाणति-धारा एतिल्लिया घडए माहिति, एवं आयरितो जाणाति एर्ग दुर्ग आलावगं गहिहितित्ति एवं परिक्खिए सीसस्स देज्जा, दुसीसस्स विवेगो, चर्चा ।। [136]
SR No.035053
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 04 Aavashyak 1 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages320
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size25 MB
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