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________________ आगम (४०) भाग-3 "आवश्यक- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 1 अध्ययनं H, मूलं - /गाथा-], नियुक्ति: ५६/१३५], भाष्यं । पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र-[४०] मूलसूत्र-[१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि:-1 * प्रत श्री आवश्यक चूणी या उपोद्घाता ॥११७॥ इयाणि दारविधीपवित्ती, सा साव न भन्नति, कम्हा ?, दारविहीए कए किल सत्थं समप्पिहिति, नयावि तदंतग्गता एव टि व्याख्यानइति पयविधीवि तत्थेव भबिहित्ति इति मा सीसस्स अविणयपडिबत्ती भविस्सति, ताहे आयरितो भणति- अच्छतु ताय विधी दारविधी य, बक्खाणविहिं भाणस्सामि, पच्छा किं च वक्खाणविधीए? इति, वक्खाणविधी नाम जारिसाओ घेतब्न जारि- गवादीन्युसस्स वा सीसस्स दायचं जहा य इति, तत्थ इमे आयरियसीसाणं उदाहरणा, एग आयरियस्स एगं सीसस्स, दोविया एगंमि *दाहरणानि चेच ओतरंति ॥ गोणी चंदण॥२-५जाएगस्स गावी भग्गा, सा पुण अतीव खीरदा, नाहे सो चितेइ-मा बहुं चुक्किहामि, कंचि बचेमि, तेण सा तणस्स उबेऊणं गोसंघाए पए चेव उवट्ठविया, तत्थ कतिता आगओ, सो भणइ- विकाइ गावी ?, तेण माणय- विक्काइ, किह लम्भति, पंचासतेण, लट्ठत्ति काउं गहिया, सोवि पलाओ, इयरो उट्ठचेह, सान तरेह उट्ठउं, तेण नायं, अहंपित्थ कंचि वचेमि, अन्नो आगतो, विक्काति?, आनं, तिपण भाणितं- विक्कमावेमि दुद्धं च जोएनि ता गिण्हामि, सो भणति-एचाहे चेव उट्टेडा, तहवि जोएमोत्ति भणति, उट्ठवेउमारा ण उट्ठति, भणति एवं चैव ठितेल्लगं गण्हाहि, इतरो न इच्छति, सो भणति- मएवि एवं विट्ठिता गहिता, इतरो भणत्ति- जदि तुम बोहो, अहं ण गेण्हामि, एवं परिसस्स पासे ण गहेयव्यं, जो अक्खितो समाणो भणति- एमेव मए सुयंति, जो अत्थं गाहेति सब्वपज्जवेहिं तस्स पासे सोयच । एतं ता आयरियस्स उदाहरणं । इमं सीमस्स-A का बारवती णगरी कण्हा वासुदेवो, तत्थ तिमि मेरीओ, तंजहा- संगामिया अन्भुतिया कोमुतिया, तिन्निपि गोसीसचंदणमदीओ,151॥११॥ देवतापरिग्गहिताओ, तस्स चउत्था भेरी असियोवसमणी, तीसे उठाणपारियाणियं कहेयब-तेणं कालेण तेणं समतंणं सक्को दं दीप अनुक्रम *84% AE% ES [129]
SR No.035053
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 04 Aavashyak 1 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages320
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size25 MB
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