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________________ आगम (४५) [भाग-३९] "अनुयोगद्वार"-चूलिकासूत्र-२ (मूलं+वृत्ति:) ................ मूलं [१४२] / गाथा ||१११-११२|| .......... पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...आगमसूत्र-[४५), चूलिकासूत्र-२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [१४२] अनुयो मलधा वृत्तिः उपक्रमे प्रमाणद्वार रीया गाथा: ||--|| ॥१८५॥ केव० ५०१, गो० ज० दस वास० उक्को०. देसूर्ण पलिओवमं, एवं जहा णाग० देवाणं देवीण य तहा जाव थणियकुमाराणं देवाणं देवीण य भाणियव्वं । पुढवीकाइयाणं भंते! के०?, गो०! जह• अंतोमु० उक्को. बावीसं वाससहस्साई, सुहुमपुढवीकाइयाणं ओहियाणं अपजत्तयाणं पजत्तयाण य तिण्णिवि पुच्छा, गो०! जह० अंतोमुहत्तं उक्कोसेणवि अंतोमुहुत्तं, बादरपुढविकाइयाणं पुच्छा, गो०! जह० अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं बावीसं वाससहस्साई, अपजत्तगबादरपु० पुच्छा, गो०! जहपणेणवि अं० उक्कोसेणवि अंक, पजत्तगवादरपु० पुच्छा, गो०! जह. अंतोमुहुर्त उको बावीसं वा० अंतोमुहत्तृणाई, एवं सेसकाइयाणंपि पुच्छावयणं भाणियव्वं, आउकाइयाणं जह• अंतो० उक्कोसे० सत्त वा०, सुहुमआउकाइ. ओहिआणं अपज्जत्तगाणं पजत्तगाणं तिण्हवि जहण्णेणवि अंतो० उक्कोसेणवि अंक, बादरआउका. जहा ओहिआणं, अपज्जत्तगबादरआ० जहन्नेणवि अंतो. उक्कोसेणवि अं०, पजत्तग दीप अनुक्रम [२८९ -२९२] अस्य सूत्रस्य क्रम: १४०' वर्तते, परन्तु मुद्रण अशुद्धित्वात् १४२' इति क्रम मुद्रितं ~381~
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
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