SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 301
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ आगम (४५) [भाग-३९] "अनुयोगद्वार"-चूलिकासूत्र-२ (मूलं+वृत्ति:) ................ मूलं [१३१] / गाथा ||८५-९०|| .......... पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...आगमसूत्र-[४५], चूलिकासूत्र-[२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [१३१] अनुयो मलधारीया वृत्तिः उपक्रमाधिक गाथा: ॥१४५॥ ||--|| णिरक्खिए य, एवं सव्वनक्खत्तेसु नामा भाणिअब्वा। एत्थं संगहणिगाहाओ-कित्तिअरोहिणिमिगसिरअदा य पुणव्वसू अ पुस्से अ। तत्तो अ अस्सिलेसा महा उ दो फग्गुणीओ अ॥१॥ हत्थो चित्ता साती विसाहा तह य होइ अणुराहा । जेट्ठा मूला पुव्वासाढा तह उत्तरा चेव ॥२॥ अभिई सवण धणिट्रा सतभिसदा दो अ होति भद्दवया । रेवई अस्सिणि भरणी एसा नक्खत्तपरिवाडी ॥३॥ से तं नक्खत्तनामे । से किं तं देवयाणामे ?, २ अग्गिदेवयाहि जाए अग्गिए अग्गिदिपणे अग्गिसम्मे अग्गिधम्मे अग्गिदेवे अग्गिदासे अग्गिसेणे अग्गिरक्खिए एवं सव्वनक्खत्तदेवयानामा भाणिअव्वा । एत्थंपि संगहणिगाहाओ-अग्गिपयावइ सोमे रुदो अदिती विहस्सई सप्पे । पिति भग अज्जम सविआ तट्रा वाऊ अइंदग्गी ॥१॥ मित्तो इंदो निरई आऊ विस्सो अ बंभ विण्हआ। वसु वरुण अयविवद्धि पूसे आसे जमे चेव ॥२॥से तं देवयाणामे । से किं तं कुलनामे ?, २ उम्गे भोगे रायपणे खत्तिप दीप अनुक्रम [२३८ 45457 -२४७] ॥१४५॥ ~301~
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy