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________________ आगम (४५) [भाग-३९] "अनुयोगद्वार"-चूलिकासूत्र-२ (मूलं+वृत्ति:) ........... मूलं [१२८] / गाथा ||३९-४२|| ................ पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...आगमसूत्र-[४५], चूलिकासूत्र-[२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक अनुयो० मलधा वतिः [१२८] रीया उपक्रमाधि० ॥१३०॥ गाथा: ||१-३२|| उत्तर मंदारयणी, उत्तरा उत्तरासमा । समोकंता य सोवीरा अभिरूवा होइ सत्तमा ॥ १६ ॥ गंधारगामस्स णं सत्त मुच्छणाओ पण्णत्ताओ, तंजहा-नंदी अ खड्डिआ पूरिमा य चउत्थी अ सुद्धगंधारा। उत्तरगंधारावि अ सा पंचमिआ हवइ मुच्छा ॥१७॥ सुट्टत्तरमायामा सा छट्ठी सव्वओ य णायव्वा । अह उत्तरायया कोडिमा य सा स त्तमी मुच्छा ॥ १८॥ एतचिरन्तनमुनिगाथाभ्यां व्याख्यायते-यथा सजाइतिहागामो, ससमूहो मुच्छणाण विन्नेओ । ता सत्त एकमेक्के तो सत्तसराण इगवीसा ॥१॥ अन्नन्नसरविसेसे उप्पायंतस्स मुच्छणा भणिया । कत्ता व मुच्छिओ इव कुणई मुच्छ व सो वत्ति ॥ २॥ कर्ता वा मूञ्छित इव ताः करोतीति मूर्च्छना उच्यन्ते, 'मुच्छ व सो वत्ति' मूर्च्छन्निव वा स कर्ता ताः करोतीति मूर्छना उच्यन्त इत्यर्थः, मङ्गीप्रभृतीनां चैकविंशतिमूर्छनानां स्वरविशेषाः पूर्वगतखरप्राभृते भणिताः, इदानीं तु तद्विनिर्गतेभ्यो भरतविशाखिलादिशास्त्रेभ्यो विज्ञेया इति। सत्त सरा कओ हवंति ? गीयस्स का हवइ जोणी । कइसमया ओसासा, कइ वा दीप अनुक्रम [१६४-२०४] 65S543 ॥१३॥ ~271
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
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