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________________ आगम (४५) [भाग-३९] “अनुयोगद्वार"-चूलिकासूत्र-२ (मूलं+वृत्ति:) ............. मूलं [११३-११४] / गाथा ||१५...|| ............ पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...आगमसूत्र-[४५], चूलिकासूत्र-[२] अनुयोगद्वार मूलं एवं हेमचन्द्रसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत RSSC वृत्तिः अनुयो मलधारीया सूत्रांक उपकर माधि [११३ -११४ ॥९८॥ से किं तं संगहस्स अणोवणिहिआ कालाणुपुवी ?, २ पंचविहा पण्णत्ता, तंजहाअट्रपयपरूवणया भंगसमुकित्तणया भंगोवदंसणया समोआरे अणुगमे (सू० ११३)। से किं तं संगहस्स अट्ठपयपरूवणया?, २ एआइं पंचवि दाराइं जहा खेत्ताणुपुवीए संगहस्स तहा कालाणु० एवि भाणिअव्वाणि, णवरं ठिइअभिलावो, जाव से तं अ णुगमे । से तं संगहस्स अणोवणिहिआ कालाणु० (सू० ११४)। यथा क्षेत्रानुपूर्व्यामियं संग्रहमतेन प्राग्निर्दिष्टा तथाऽत्रापि वाच्या, नवरं 'तिसमयट्टिइआ आणुपुब्बी जाव असंखेजसमयठिइआ आणुपुम्वी'त्यादि अभिलापः कार्यः, शेषं तु तथैवेति ॥ ११४ ॥ उक्ता संग्रहमतेनाप्यनीपनिधिकी कालानुपूर्वी, तथा च सति अवसितस्तद्विचारः, इदानीं प्रागुद्दिष्टामेवोपनिधिकीं तां निर्दिदिक्षुराह से किं तं उवणिहिआ कालाणुपुव्वी?, २ तिविहा पण्णत्ता, तंजहा-पुब्वाणु० पच्छाणु०अणाणुलासे किं तं पुव्वाणु०१, २ समए आवलिआ आण पाणू थोवे लवे मुहत्ते दीप अनुक्रम [१३६ ॥९८॥ -१३७] अथ 'समय' गणितं प्रकाश्यते ~207~
SR No.035039
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 39 Anuyogdwar Mool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages560
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anuyogdwar
File Size129 MB
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