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________________ आगम (४०) [भाग-२८] “आवश्यक”- मूलसूत्र-१/१ (मूलं+नियुक्ति:+वृत्तिः ) अध्ययनं -1, मूलं - /गाथा-], नियुक्ति: [३९४], भाष्यं [४३...], आवश्यक हारिभद्री.यवृत्ति विभागा ॥१६॥ * निगदसिद्धाः ॥ नामानि प्राक्प्रतिपादितान्येव, साम्प्रतं चक्रवर्तिगोत्रप्रतिपादनायाह--- कासवगुत्ता सब्वे चउदसरयणाहिवा समक्खाया। देविंदरदिएहिं जिणेहिं जिअरागदोसेहिं ।। ३९४॥ सूत्रसिद्धा ।। साम्प्रतं चक्रवत्योयुष्कप्रतिपादनायाह चउरासीई १ यावत्तरी अ पुब्वाण सयसहस्साई२॥ पंच ३ य तिषिण अ४ एगं च ५ सयसहस्सा उ वासाणं ॥ ३९५ ।। पंचाणउइ सहस्सा ६ चउरासीई अ ७ अहमे सही८1 तीसा ९य दस १० य तिणि ११ अ अपच्छिमे सत्तवाससया १२ ॥ ३९६ ।। गाथाद्वयं पठितसिद्धम् ॥ इदानी चक्रवर्तिनां पुरप्रतिपादनायाह जम्मण विणीअ १ उज्झा २ सावत्धी ३ पंच हथिणपुरमि८। वाणारसि९ कंपिल्ले १०रायगिहे ११ चेव कंपिल्ले १२ ।। ३९७॥ निगदसिद्धा एव ।। साम्प्रतं चक्रवर्तिमातृप्रतिपादनायाह सुमंगला १ जसवई २ भद्दा ३ सहदेवि ४ अहर ५ सिरि ६ देवी ७॥ तारा ८ जाला ९ मेरा १० य वप्पगा ११ तह य चूलणी अ॥ ३९८॥ निगदसिद्धा ॥ साम्प्रतं चक्रवर्तिपितृप्रतिपादनाथाह | ॥१६॥ पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[४०] मूलसूत्र-[१] आवश्यक मूलं एवं हरिभद्रसूरिरचिता वृत्ति: | चक्रवर्तिनां आयुः, नगरी, माता आदिनाम् नाम-निर्देश: ~332~
SR No.035028
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 28 Aavashyak Mool evam Vrutti Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages466
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size97 MB
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