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________________ आगम (४०) [भाग-२८] “आवश्यक”-मूलसूत्र-१/१ (मूलं+नियुक्ति:+वृत्ति:) अध्ययनं -1, मूलं [-/गाथा-], नियुक्ति: [३४३], भाष्यं [३१...], आवश्यक ॥१४९॥ प्रत सूत्रांक द सभाए धर्म कहेइ, तत्थ उसभसेणो नाम भरहपुत्तो पुववद्धगणहरनामगोत्तो जायसंवेगो पबइओ, बंभी य पवइआ, हारिभद्री भरहो सावगो जाओ, सुंदरी पचयंती भरहेण इत्थीरयणं भविस्सइत्ति निरुद्धा, सावि साविआ जाया, एस चउबिहो सम- यवृत्तिः णसंघो । ते य ताबसा भगवओ नाणमुप्पण्णंति कच्छमहाकच्छवजा भगवओ सगासमागंतूण भवणवइयाणमंतरजोइ-18 |विभागः१ सियवेमाणियदेवाइण्णं परिसं दहण भगवओ सगासे पबइआ, इत्थ समोसरणे मरीइमाइआ बहवे युमारा पपइआ । साम्प्रतमभिहितार्थसंग्रहपरमिदं गाथाचतुष्टयमाह|सह मरुदेवाइ निग्गओ कहणं पब्बल उसभसेणस्स।भीमरीइदिक्खा सुंदरी ओरोहसुअदिक्खा ॥३४४॥18 [पंच य पुससयाई भरहस्स य सत्त नसूअसयाई । सयराह पब्बइआ तंमि कुमारा समोसरणे ॥ ३४५ ॥ भवणवइवाणमंतरजोइसवासी विमाणवासी अ । सविड्डिइ सपरिसा कासी नाणुप्पयामहिम ॥३४६॥ दडूण कीरमाणिं महिमं देवेहि खत्तिओ मरिई । सम्मत्तलद्धबुद्धी धम्मं सोऊण पब्वइओ ॥ ३४७ ।। व्याख्या-कथन' धर्मकथा परिगृह्यते, मरुदेव्यै भगवद्विभूतिकथनं वा । तथा 'नप्तशतानीति' पौत्रकशतानि । तथा अनुक्रम |॥१४९॥ सभायां धर्म कथयति, सन्त भयमसेनो नाम भरतपुत्रा पूर्वपद्धगणधरनामगोत्रः जातसंवेगः प्रबजिता, पाणी प्रजिता, भरतः श्रावको | जातः, सुन्दरी अनजन्ती भरतेन खीरवं भविष्यतीति निरुद्धा, सापि श्राविका ज्ञाता, एष चतुर्विधः श्रमगसर से च तापसा भगवतो शानमुपनमिति कच्छमहाकच्छवर्जा भगवतः सकाशामागत्य भवनपतिप्यन्तरज्योतिष्कवैमानिकदेवाकीणों पर्पदं रहा भगवतः सकाशे प्रनजिताः, अत्र समवसरणे मरीच्यादिका बहवः कुमाराः प्रबजिता: JABERatinintamational पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[४०] मूलसूत्र-[१] आवश्यक मूलं एवं हरिभद्रसूरिरचिता वृत्ति: ~308~
SR No.035028
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 28 Aavashyak Mool evam Vrutti Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages466
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size97 MB
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