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________________ आगम (१८) “जम्बूद्वीप-प्रज्ञप्ति” – उपांगसूत्र-७ (मूलं+वृत्ति:) वक्षस्कार [४], ------------------------ ------- मूलं [८३] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[१८]उपांगसूत्र-[७] "जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति" मूलं एवं शांतिचन्द्र विहिता वृत्ति: प्रत द्वीपशा वक्षस्कारे सनदीकति सुत्राक न्तिचन्द्रीया वृचिः ॥३०७॥ Recenea [८३] दीप स चैर्य से केणद्वेण भन्ते! एवं पुषइ-तिर्गिछिदहे ' इत्यादि पारसूत्रानुसारेण वाच्यं यावत् तिगिछिद्रहवर्णाभानि उत्पलादीनि घृतिश्चात्राधिपत्यं परिपालयति 'से तेणटेणं इत्यादि प्राग्वत् ॥ अथास्माद्या दक्षिणेन नदी प्रवहति तामाह- तस्स णं तिगिरिदहस्स दक्खिणिल्लेणं तोरणेणं हरिमहाणई पबूढा समाणी सत्त जोअणसहस्साई चत्तारिअ एकवीसे जोअणसए एगं च एगूणवीसइभागं जोअणस्स दाहिणामिमुद्दी पचएणं गता महया घडमुहपवित्तिएणं जाब साइरेगचउजोमणसइएणं पवाएणं पवइ, एवं जा पेव हरिकन्ताए बत्तन्वया सा चेव हरीएवि अब्बा, जिभिआए कुंडस्स दीवस्स भवणस त व पमाण अट्ठोऽवि भाणिभव्यो जाव अहे जगई दालइत्ता छप्पण्णाए सलिलासहस्सेहिं समग्गा पुरस्थिमं लवणसमुई समप्पड, तं व पवहे अ मुहमूले अ फ्माण बहो म जो हरिकम्ताए जाव वणसंडसंपरिक्सिन्ता, तरस गं तिगिछिरहस्स उत्तरिलेणं तोरणेणं सीओमा महाणई पबूदा समाणी सत्त जोअणसहस्साई चत्तारि अ एगवीसे जोअणसए एगं च एगूणवीसहभागं जोअणस्स उत्तराभिमुही पवएणं गंता मया घडमुहपवित्तिएणं जाव साइरेगचउजोअणसइएणं पवारणं पवडइ, सीओआ णं महाणई जओ पवडइ एल्थ णं महं एगा जिभिषा पण्णचा चत्तारि जोषणाई आयामेणं पण्णास जोषणाई विक्खम्भेणं जोअणं पाहणं मगरमुहविउडुसंठाणसंठिा सबबरामई अच्छा, सीओआ णं महाणई जहिं पवडद एत्य णं महं एगे सीओअप्पवायकुण्डे णामं कुण्डे पण्णत्ते चत्तारि असीए जोअणसए आयामविक्खंभेणं पण्णरसअट्ठारे जोअणसए किंचिविसेसूणे परिक्वेणं अच्छे एवं कुंडवत्तव्वया अठवा जाव तोरणा । तस्स णं सीओअप्पवायकुण्डस्स बहुमझदेसभाए एत्थ महं एगे सीओअदीवे णाम दीवे पण्णत्ते अनुक्रम [१३८] senese ॥३०७॥ I ndimetrinary ~269
SR No.035024
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 24 Jambudwippragyapti Mool evam Vrutti Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages426
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_jambudwipapragnapti
File Size104 MB
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