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________________ आगम (१८) “जम्बूद्वीप-प्रज्ञप्ति” – उपांगसूत्र-७ (मूलं+वृत्ति:) वक्षस्कार [३], ------------------------ ------ मूलं [६७] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[१८]उपांगसूत्र-[७] "जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति" मूलं एवं शांतिचन्द्र विहिता वृत्ति: I प्रत PAL सत्रांक [६]] कृष्णासमसण्णिवेसेसु सम्म पयापालणोबज्जिालद्धजसे महया जाव आहेवचं पोरेवचं जाक विहराहित्तिक? जयजयसई पउंजंति, लए णं से भरहे राया गयणमालासहस्सेहिं पिच्छिज्जमाणे२ क्यणमालासहस्सेहिं अमिथुब्बमाणे२ हिजयमालासहस्सेईि उष्णंदिजमाणे २ मणोरहमालासहस्सेहिं विच्छिापमाणे २ तिरूवसोहम्गगुणेहिं पिच्छिजमाणे २ अंगुलिमालासहस्सेहिं दाइजमाणे २ दाहिणहत्येणं बहूर्ण णरणारीसहस्साणं अंजलिमालासहस्साई पडिच्छमाणे २ भवणपंतीसहस्साई समइच्छमाणे २ तंतीतलतुडिअगीभवाइअरवेणं मधुरेणं मणहरेणं मंजुमंजुणा घोसेणं अपडिबुज्झमाणे २ जेणेव सए गिहे जेणेव सए भवणवरवडिंसयदुवारे तेणेव उवागच्छइ रत्ता आभिसेक हस्थिरयणं ठयेइ २ ता अमिसेकाओ इत्थिरयणाओ पचोरुहइ २त्ता सोलस देवसहस्से सकारेइ सम्माणेइ २ चा बत्तीसं रायसहस्से सकारेइ सम्माणेइरत्ता सेणावइरयणं सकारेइ सम्माणेइरता एवं गाहावइरयणं वद्धहरयणं पुरोहियरयणं सकारेइ सम्माणेइ २ता तिणि सढे सूअसए सकारेइ सम्माणेइर का अट्ठारस सेणिप्पसेणीओ सक्कारेइ सम्माणेइ रत्ता अण्णेवि बहवे राईसर जाव सत्यवाहपमिईओ सकारेइ सम्माणेइ २ ता पडिविसज्जेइ, इत्थीरयणेणं बत्तीसाए उडुकल्लाणिआसहस्सेहिं बत्तीसाए जणवयकल्लाणिासहस्सेहिं बत्तीसाए बत्तीसइबद्धेहिं णादवसहस्सेहिं सर्द्धि संपरिबुडे भवणवरष डिंसर्ग आइ जहा कुवेरो व देवराया कैलाससिहरिसिंगभूति, तए णं से भरहे राया मित्तणाइणिभगसयणसंबंधिपरिअणं पशुवेक्खा २ त्ता जेणेष मजणघरे तेणेव उवागकछइ २ चा जाच मज्जणघराओ पडिणिक्खमइ २त्ता जेणेव भोअणमंडवे तेणेव उवागच्छइ २त्ता भोअणभंडवंसि सुहासणवरगए अट्ठमभत्तं पारेइ २त्ता उर्षि पासावरगए फुटमाणेहि मुइंगमस्थपहिं बत्तीसइबद्धेहिं णाडएहिं उचलालिजमाणे २ उवणचिजमाणे २ उवगिजमाणे २ महया जाव मुंजमाणे विहरत (सूत्रम् ६७) दीप अनुक्रम [१२१] see caceaeKEReacsease ~178~
SR No.035024
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 24 Jambudwippragyapti Mool evam Vrutti Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages426
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_jambudwipapragnapti
File Size104 MB
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